कुर्जी अस्पताल से भी संस्थान करेगा करार
पटना सिटी : अगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान परिसर में मरीजों पर बीमारियों के अनुसंधान करने के लिए नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड से अनुमति लेनी होगी, इसके लिए अनुसंधान आधारित प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना कर एथिकल कमेटी को सौंपनी होगी. इसके बाद वह रिपोर्ट का अध्ययन कर अनुमति देगी, तभी अनुसंधान कर पायेंगे. गुरुवार को अनुसंधान से जुड़ा यह करार महावीर कैंसर संस्थान के साथ आरएमआरआइ ने किया है.
आयोजित कार्यक्रम में महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ विश्वजीत सान्याल, एसोसिएट निदेशक डॉ मनीषा सिंह, डॉ विनिता त्रिवेदी व डॉ रिचा की उपस्थिति में एथिकल कमेटी के सामने निदेशक डॉ प्रदीप दास ने करार किया. संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप दास ने बताया कि कैंसर व अन्य बीमारी पर जो अनुसंधान होगा, उसके लिए आधारभूत संरचना, वैज्ञानिक व उपकरण मुहैया कराये जायेंगे. महावीर संस्थान से अनुसंधान के प्रोजेक्ट यहां बिना अनुमति के लिए भेजा जायेगा. इसके बाद यहां की एथिकल कमेटी की मंजूरी के बाद ही अनुसंधान होगा. अनुमति से पहले कमेटी प्रोजेक्ट की समीक्षा करेगी.
जेनेरिक दवाओं का करें प्रयोग
महावीर कैंसर संस्थान के एसोसिएट निदेशक डॉ मनीषा सिंह ने बताया कि कैंसर को नियंत्रित करने में कारगर इम्यून थेरेपी नयी पद्धति है, जबकि कीमोथेरेपी पहले से है. पर उपयोग में आने वाली दवा महंगी है. कोशिश होगी कि दवाओं पर अनुसंधान कर जेनेरिक दवा का उपयोग करें, ताकि कम खर्च हो. प्रथम स्टेज में कैंसर पकड़ में आये,तो काफी हद तक बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है.
एसोसिएट निदेशक डॉ मनीषा ने सरकार के स्तर पर कैंसर की जांच से जुड़ी स्क्रीनिंग कराने की बात कही, ताकि बीमारी का पता प्रथम स्टेज में ही चल सके. आयोजन में एथिकल कमेटी के सचिव डॉ कृष्णा पांडे, डॉ सच्चिद्र चौधरी, डॉ कुमारी इंदु सिन्हा, डॉ एमएल वर्मा, प्रो प्रवीण कुमार, डॉ वीएनआर दास, डॉ एसके सिंह, डॉ सीएस लाल, डॉ मधुकर, डॉ नीता वर्मा, प्रवीण कुमार, अविनाश, मनोरंजन, डॉ एके घोष, राकेश बिहारी वर्मा, संजय चौबे समेत अन्य उपस्थित थे. निदेशक डॉ प्रदीप दास ने बताया कि आरएमआरआइ बिहार का इकलौता संस्थान है, जिसे नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड की अनुमति मिली है. कुर्जी अस्पताल से भी अनुसंधान पर अगले सप्ताह समझौता होगा.
