Patna News: राजधानी को स्मार्ट व स्वच्छ बनाने के लिए पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड (Patna Smart City Limited) एक हाइटेक सिविक सर्विसेज सर्विलांस एंड मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है. इसके तहत अब शहर की समस्याओं को खोजने के लिए मैन्युअल सर्वे की जरूरत नहीं होगी. सर्वे के लिए एआइ कैमरों से लैस इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पटना के हर वार्ड की सड़कों पर दौड़ेंगे. इन वाहनों का नाम नगर नेत्र (Nagar Netra) दिया गया है. ये गाड़ियांसड़कों पर कचरा, खुले मैनहोल, खराब स्ट्रीट लाइट व अवैध कब्जों की पहचान कर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेंगी. ये वाहन पूरी तरह से पटना स्मार्ट सिटी व नगर निगम (Patna Municipal Corporation) की ब्रांडिंग के साथ सड़कों पर उतरेंगी. इसे चार्ज करने के लिए आइसीसीसी (ICCC) या अन्य चिह्नित जगहों पर चार्जिंग हब भी बनाए जाएंगे.
पटना स्मार्टसिटी की पीआरओ प्रिया सौरव ने कहा कि प्रोजेक्ट पर 8.95 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसका मुख्य उद्देश्य तकनीक के जरिए नागरिक सुविधाओं को बेहतर करना है. हालांकि, प्रोजेक्ट के संचालन के लिए एक पीडी, 2 सिटी कोऑर्डिनेटर व 19 ड्राइवरों सहित कुल 27 लोगों की टीम तैनात रहेगी. नवंबर 2026 तक प्रोजेक्ट धरातल पर आ जायेगी. साथ ही, एजेंसी ही अगले 36 महीनों तक संचालन व रखरखाव करेगी.
सप्ताह में दो बार हर वार्ड की सड़कों की स्क्रीनिंग करेंगी एआइ
पटना नगर निगम के अंतर्गत 75 वार्डों में करीब 19 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर तैनात होंगे. इसे हर चार वार्ड पर एक को निगरानी (Surveillance) की जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. इन गाड़ियों पर हाइ रेजोल्यूशन वाले 4केडैशकैम(4KDashcams) लगे होंगे, जो 110 डिग्री के वाइड एंगल पर वीडियो रिकॉर्ड करेंगे. ये गाड़ियां रोस्टर के आधार पर सप्ताह में दो बार हर वार्ड की सभी सड़कों की स्क्रीनिंग करेंगी. कैमरों में जीपीएस लगा होगा, जिससे किसी भी समस्या की सटीक लोकेशन यानी लैटीट्यूड व लोंगीट्यूड का पता चल सकेगा.
एआइ (AI) तकनीक से खुद-ब-खुद जेनरेट होगा चालान
सड़कों पर दौड़ती इन गाड़ियों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण करने के लिए आइसीसीसी भवन में एक ‘सेंट्रल सिविक सर्विसेज ऑपरेशंससेंटर’ (C-SOC) बनाया जाएगा. यहां लगा स्मार्ट एआइ(AI) इंजन कचरे के ढेर, सड़क के गड्ढों, अवैध होर्डिंग्स और लावारिस पशुओं की पहचान करेगा. अगर कहीं एक मीटर से बड़ा कचरे का ढेर या 10 इंच से बड़ा गड्ढा मिलता है, तो सिस्टम खुद उसका स्क्रीनशॉट लेकर रिपोर्ट तैयार कर देगा. यह सिस्टम इतना एडवांस होगा कि अवैध विज्ञापन मिलने पर संभावित चालान की राशि की गणना भी कर सकेगा. इससे नगर निगम के अधिकारियों को रियल टाइम डैशबोर्ड पर पता चल जाएगा कि किस इलाके में क्या समस्या है.
मोबाइल ऐप से ठेकेदारों व फील्ड स्टाफ की होगी मॉनिटरिंग
प्रोजेक्ट के तहत फील्ड स्टाफ, ठेकेदारों और निगम अधिकारियों के लिए एक विशेष एंड्रॉइडऐप विकसित किया जाएगा. जैसे ही एआइ कैमरा किसी समस्या जैसे खराब स्ट्रीट लाइट या टूटा मैनहोल को पकड़ेगा, तो संबंधित ठेकेदार या कर्मचारी के ऐप पर एक टिकट जेनरेट हो जाएगा. ठेकेदार को उस काम को ठीक कर ऐप पर ही फोटो के साथ स्टेटस अपडेट करना होगा. इससे काम की निगरानी आसान हो जाएगी और फाइलों में काम अटका नहीं रहेगा. डेटा की सुरक्षा के लिए सभी एप्लिकेशन को सर्ट इन (CERT-In) से प्रमाणित कराया जाएगा.
ट्रैफिक पुलिस व कचरा गाड़ियों से भी जुड़ेगा सिस्टम
पहले चरण में पटना में प्रोजेक्ट सफल होने पर इसका दायरा बढ़ाया जाएगा. दूसरे फेज में इसे ट्रैफिक पुलिस की गाड़ियों और नगर निगम के कचरा वाहनों से भी जोड़ने की योजना है. भविष्य में यह सिस्टम सड़क के किनारों के टूटे डिवाइडर, धुंधली पड़ चुकी रोड मार्किंग व टूटे हुए पेवर ब्लॉक की भी पहचान करेगा. इसके अलावा, गिरमिटिया मजदूरों की याद में बने स्मारकों जैसे ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और निगरानी के लिए भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है. यह पूरा मॉडल स्केलेबल बनाया गया है ताकि मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ व भागलपुर जैसे अन्य स्मार्ट शहरों में इसे आसानी से कॉपी किया जा सके.
इन चार प्वाइंट में समझें नगर नेत्र प्रोजेक्ट
– प्रोजेक्ट के संचालन के लिए एक पीडी, 2 सिटी कोऑर्डिनेटर व 19 ड्राइवरों सहित कुल 27 लोगों की टीम तैनात रहेगी.
– डैशबोर्ड पर मिलने वाली शिकायतों और फोटो का रिकॉर्ड कम से कम एक साल तक सुरक्षित रखा जाएगा.
– मुख्य रूप से कचरा, सड़क के गड्ढे, खुले मैनहोल, खराब स्ट्रीट लाइट, अवैध होर्डिंग, अतिक्रमण और सड़कों पर घूमने वाले मवेशी.
– डैशकैम से डेटा ट्रांसफर के लिए 5जी सिम और वाइ-फाइ तकनीक का उपयोग होगा.
