फुलवारीशरीफ : परसा बाजार के पलंगा गंजपर स्कूल मैदान राजधानी से बमुश्किल दस किलोमीटर दूर स्थित है. यहां के लोगों को इस बात का मलाल है कि चुनाव में बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं का हेलीकॉप्टर यहां उतरता जरूर है, लेकिन चुनाव के बाद कोई दोबारा झांकने नहीं आता. समस्याएं जस की तस मुंह बाये खड़ी हैं. यह मुद्दाविहीन चुनाव है.
विकास की कोई बात नहीं हो रही है. शिक्षा, सड़क, रोजगार, सुरक्षा की कोई बात नहीं हो रही है. एक हाइस्कूल है उसमें भी सुविधाओं का घोर अभाव है. जिस पलंगा हाइस्कूल मैदान पर बड़े-बड़े शीर्ष नेताओं का हेलीकॉप्टर उतरता है, उस विद्यालय की चहारदीवारी नहीं करायी गयी है. हमारी समस्याओं के लिए जो लड़े, वैसे नेता को ही वोट देंगे.
बेरोजगारी है. गांव के लड़के पढ़ लिखकर भटक रहे हैं. नोटबंदी और जीएसटी से किसानों की परेशानी बढ़ी है. हमारी समस्याओं के समाधान के लिए पार्लियामेंट में मजबूती से आवाज उठाने वाला नेता चाहिए.
-डॉ सुनील यादव, ठुड्ढीपुर गांव निवासी
यह दुर्भाग्य है कि हमारे देश का चुनाव राम मंदिर और पाकिस्तान के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है. राजनेता जनता की मूलभूत समस्याओं से ध्यान भटका दे रहे हैं. यह मुद्दाविहीन चुनाव है. विकास की कोई बात नहीं हो रही है.
-जितेंद्र कुमार, किसान कॉलोनी
एक हाइस्कूल है. उसमें भी सुविधाओं का अभाव. प्लस टू की सुविधा सिर्फ कागज पर है. शिक्षक की कमी से बच्चे पढ़ाई के बदले खेल में समय बर्बाद करते हैं. नेता वादे करके गये, पूरा नहीं हुआ. सड़क बनी, लेकिन राशि की लूट- खसोट हो गयी.
-सीता राम सिंह, पलंगा गंजपर निवासी
शिक्षा व्यवस्था में सुधार कराने वाला नेता चाहिए. जिस पलंगा हाइस्कूल मैदान पर बड़े-बड़े शीर्ष नेताओं का हेलीकॉप्टर उतरता है, उस विद्यालय की चहारदीवारी नहीं करायी गयी. शिक्षकों की कमी है. मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराने वाला स्थानीय जनप्रतिनिधि हो.
-विद्यानंद सिंह, पलंगा निवासी
नेता चुनाव जीत कर जाते हैं तो दोबारा नजर नहीं आते. गंजपर से शाहपुर की सड़क सात-आठ साल पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनी थी. अब सड़क की हालत जर्जर है.
-राजू यादव, पूर्व मुखिया, ढिबड़ा पंचायत
नेताओं को केवल अपने विकास की ही चिंता रहती है. जनता के विकास का कोई काम नहीं हो रहा है. नेता ऐसा हो जो जनता की समस्या को अपनी समस्या समझे उसका समाधान करे .
-नीतीश कुमार
परसा से बंगला पर जाने वाली सड़क की हालत खराब है. शराबबंदी के बाद भी गांव में शराब बन रही है. अधिक पैसा कमाने के लालच में जहां शराब निर्माण नहीं होता था वहां के लोग भी इस धंधे में लग गये हैं. कोई रोकने वाला नहीं है. युवाओं और मजदूरों की जिंदगी बर्बाद हो रही है.
-उदय प्रसाद,
कनकट्टी चक
