अनिकेत त्रिवेदी
पटना : नोटबंदी और फिर जीएसटी की मार से रियल एस्टेट और जमीन कारोबार अब उबर चुका है. वित्तीय वर्ष 2018-19 की समाप्ति के बाद जिला निबंधन कार्यालय से जो आंकड़े आये हैं, उनसे इसकी पुष्टि होती है. 2018-19 में पूरे जिले में 86,367 जमीन व फ्लैटों की रजिस्ट्री हुई है, जो वर्ष 2017-18 के मुकाबले 8,861 अधिक है. साथ ही समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में रजिस्ट्री से 815 करोड़ 70 लाख 72 हजार 26 रुपये राजस्व जिला निबंधन कार्यालय को मिला, जो वर्ष 2017-18 के मुकाबले 111 करोड़ 79 लाख 81 हजार 591 रुपये अधिक है.
निबंधन कार्यालय के अधिकारी की मानें तो जीएसटी के लगभग दो और नोटबंदी के लगभग तीन वर्ष बीतने के बाद अब धीरे-धीरे जमीन व फ्लैट की खरीद-बिक्री का ग्राफ बढ़ा है. आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017-18 में पूरे जिले में 703 करोड़ 90 लाख 25 हजार 635 रुपये की रजिस्ट्री हुई थी. इसके अलावा जमीन व फ्लैटों की कुल 77506 रजिस्ट्रियां हुई थीं, जबकि वर्ष2018-19 में उपरोक्त आंकड़ा काफी अधिक है. वर्ष 2017-18 में रजिस्ट्री से 898 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य दिया गया था, उस दौरान 78.38% लक्ष्य की प्राप्ति हुई थी. वहीं, वर्ष 2018-19 में यह लक्ष्य 932 करोड़ रुपये का था, जो 87.52% तक हासिल हुआ.
विक्रम व मसौढ़ी में लक्ष्य से अधिक राजस्व
जिले में राजस्व वसूली व रजिस्ट्री के मामले में पटना सदर अनुमंडल सबसे आगे है. इस बार यहां 15006 रजिस्ट्रियां हुईं, जिनसे 318 करोड़ 10 लाख 23 हजार 914 के राजस्व की प्राप्ति हुई है. विक्रम व मसौढ़ी में लक्ष्य से अधिक रजिस्ट्री से राजस्व की प्राप्ति हुई है.
इलाका राजस्व लक्ष्य हासिल
पटना सदर 318.10 करोड़ 80.74%
पटना सिटी 96.06 करोड़ 88.13%
दानापुर 170.14 करोड़ 87.71%
बाढ़ 22.48 करोड़ 93.68%
बिक्रम 49.48 करोड़ 108.90%
मसौढ़ी 35.27 करोड़ 103.76%
फुलवारीशरीफ 124.62 करोड़ 94.41%
जमीन अधिक, फ्लैट कम बिके
अब भी जमीन के मुकाबले फ्लैटों की रजिस्ट्री काफी हो रही है. जिला निबंधन कार्यालय जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री का आंकड़ा अलग-अलग तैयार कर रहा है. निबंधन कार्यालय के कर्मी बताते हैं कि कुल रजिस्ट्री में 70% से अधिक रजिस्ट्री जमीन की है, जबकि फ्लैटों की रजिस्ट्री काफी कम है.
अब नोटबंदी व जीएसटी का असर जमीन व फ्लैटों के खरीद-बिक्री पर से लगभग समाप्त हो गया है. बीते वर्षों में रेरा को लेकर थोड़ी परेशानी हुई थी. इस कारण मामला स्थिर हो गया था. अब फिर जमीन-फ्लैट की खरीद-बिक्री में रुचि बढ़ी है. मार्केट बढ़ रहा है. फिर भी 100% राजस्व की प्राप्ति नहीं हुई.
– एसएन चौधरी, जिला निबंधन पदाधिकारी, पटना
