कानून से कम नहीं सियासत की चर्चा, बातों-बातों में बना-बिगाड़ रहे सरकार

दोपहर एक बजे का समय. सिविल कोर्ट परिसर. शनिवार को अधिवक्ताओं ने काम बंद रखा था, तो हर तरफ फ्री मूड में लोग चर्चाओं को दौर में मशगूल थे. उसी एक चर्चा में प्रभात खबर की टीम पहुंची. वहां हाइकोर्ट के एक अधिवक्ता एसके मिश्रा ने अपनी बात छेड़ रखी थी. वो बता रहे थे […]

दोपहर एक बजे का समय. सिविल कोर्ट परिसर. शनिवार को अधिवक्ताओं ने काम बंद रखा था, तो हर तरफ फ्री मूड में लोग चर्चाओं को दौर में मशगूल थे. उसी एक चर्चा में प्रभात खबर की टीम पहुंची.

वहां हाइकोर्ट के एक अधिवक्ता एसके मिश्रा ने अपनी बात छेड़ रखी थी. वो बता रहे थे कि लोग चुनाव में गरीबी को जनसंख्या से जोड़ देते हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है.
चुनाव में हम वकीलों की तो कोई बात ही नहीं कर रहा. बात को आगे बढ़ाते हुए अधिवक्ता मधुसुदन लाल ने कहा- छोड़िए भाई, यहां वकीलों को बैठने की जगह नहीं है, लोग प्लास्टिक के नीचे बैठने के लिए परेशान है, आप ही बताइए, हम वकीलों को कोई बैंक लोन ही नहीं देता और इस मुद्दे को कोई सांसद उठाता भी नहीं है.
अागे अधिवक्ता ने विनोद कुमार गुप्ता बोले-इस बार हम लोगों को ऐसे सांसद को चुनना होगा, जो हमारी आगे आने वाली जनरेशन की बेहतरी की बात करें.पटना साहिब से रविशंकर जी लड़ रहे है, लेकिन कानून मंत्री रहते हुए वकीलों के हित में उन्होंने बात नहीं की…
लोकसभा चुनाव की सरगर्मी अपने परवान पर है. संसद में भले ही 23 मई के बाद सरकार बने, लेकिन शहर के चौक-चौराहों, पब्लिक प्लेस, आॅफिस व दुकान से लेकर हर तरफ लोग अपने हिसाब से उम्मीदवार और पार्टी को जिता और हरा रहे हैं.
प्रभात खबर इसी चुनाव मूड को भांपने के लिए विभिन्न जगहों पर जाकर इस स्वयं से चल रही चुनावी चौपाल में भाग ले रहा है. और उस आम लोगों की खास बातों को सामने लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि नेता आम मतदाताओं की जरूरतों को समझें और अपनी पार्टी के एजेंडे में शामिल करें.
इस क्रम में शनिवार को अशोक राजपथ पर स्थित सिविल कोर्ट में अधिवक्ताओं में चल रही चुनावी चकल्लस में भाग लिया. यहां अदालत के परिसर में भी कानून से कम नहीं थी सियासत की चर्चा, अधिवक्ता बातों-बातों में सरकार बना-बिगाड़ रहे थे.
वकीलों के बीच हो रही चुनावी चर्चा में गरीबी पर्यावरण, बेरोजगारी जैसे मुद्दे हैं हावी
वकीलों ने कहा- प्रदूषण,बाढ़, सुखाड़ जैसे मुद्दों को चुनाव में कोई नहीं करता शामिल
देश आजाद होने के 70 वर्ष हो गया, आज भी बुनियादी समस्याओं का निदान नहीं हुआ है. हम शुद्ध पानी, रोजगार, पढ़ाई, सिंचाई से लेकर अन्य जरूरी मुद्दों पर लड़ रहे हैं. केवल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट ही नहीं सिटीजन प्रोटेक्शन एक्ट लागू होना चाहिए. हवा में मुद्दों पर आये बातों पर चर्चा नहीं हो.
– राजेश्वर प्रसाद सिन्हा, अधिवक्ता सह पूर्व
सदस्य बार काउंसिल
पटना में प्रदूषण बढ़ रहा है. कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ की स्थिति पूरे राज्य में रहती है, लेकिन इन मुद्दों को कोई चुनाव में शामिल नहीं कर रहा. हमें बंगला देश व भारत का जल समझौता रद्द करना होगा. ये लोकसभा चुनाव है यहां स्थानीय मुद्दों के अलावा राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मुद्दे पर चुनाव होता है.
– अशोक राज,
अधिवक्ता
चुने हुए प्रतिनिधियों को समस्याओं को समक्ष नहीं होती. भू-जल एक बड़ी समस्या बन के उभर रहा है. विकास के नाम पर पेड़ों को काट दिया जाता है. इस पर किसी का ध्यान नहीं है. नेताओं पर नौकरशाही हावी है. बुनियादी नहीं, अपने गढ़े हुए मुद्दों पर चुनाव लड़ने की कोशिश हो रही है.
– रामचंद्र लाल दास,
अधिवक्ता हाइकोर्ट
पार्टी या उम्मीदवार अगर अपने घोषणा पत्र को पूरा नहीं करता, तो उसपर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. इसको लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना होगा. अपने फायदे के कानून बनाने के लिए पक्ष व विपक्ष एक हो जाते हैं, लेकिन जनता के मुद्दों पर विरोध का स्वांग रचा जाता है, इस बात हो भी समझना होगा.
– शिवानंद गिरी, अधिवक्ता
नेताओं में वंशवाद हावी है. चरित्र और शिष्टाचार खराब हो चुके हैं. केवल चतुराई से अपना काम निकालने की कोशिश हो रही है. पूरा सिस्टम बिगड़ चुका है. ऐसे में किस को चुना जाये, ये बड़ी चुनौती है.
– केके तिवारी, अधिवक्ता
जातिवाद, वंशवाद और आरक्षण के नाम पर लोगों को लड़ाने की कोशिश हो रही है. जब चुनाव आते है तो चर्चा जोड़ पकड़ लेती है. लोग अाम जरूरतों वाले मुद्दे को छोड़ बेकार के मुद्दों में फंस जाये, इसकी कोशिश हो रही है. हमें ध्यान देना होगा.
– डॉ श्रद्धानंद पासवान, अधिवक्ता

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