पटना : विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि देश में एससी- एसटी को 1931 की पुरानी जनगणना के मुताबिक़ आबादी के अनुपात में 22. 5 प्रतिशत समान आरक्षण मिला था, लेकिन आज दलितों की भी आबादी बढ़ी है. इसलिए एससी- एसटी का भी आरक्षण बढ़नी चाहिए. अब 50 प्रतिशत की सीलिंग टूट गयी है, इसलिए केंद्र आरक्षण बढ़ाए.
उन्होंने कहा कि आरक्षण की सीमा 90 प्रतिशत कर उसमें से अतिपिछड़ों को 40 प्रतिशत आरक्षण मिले. श्री यादव ने कहा कि मंडल कमीशन के अनुसार ओबीसी की संख्या 52 प्रतिशत थी. अब भी पूरी तरह से ओबीसी आरक्षण लागू नहीं हुआ है. उच्च शिक्षा में आरक्षण लगभग ख़त्म कर दिया है.
आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कोई कमीशन नहीं बना. कोई आंदोलन नहीं हुआ, लेकिन 72 घंटे में बिन मांगे आरक्षण दे दिया गया. 1931 की जनगणना के मुताबिक़ पिछड़ों की आबादी 52 प्रतिशत थी. पिछड़ों को आज़ादी के 46 साल बाद 1993 में मात्र 27 प्रतिशत ही आरक्षण मिला. उच्च शिक्षा में 2008 में आरक्षण मिला वो भी मोदी जी की मनुवादी सरकार विभिन्न तरीक़ों से समाप्त कर रही है.
