फीकल कॉलीफॉर्म की मात्रा चरम पर
पटना : पुनपुन नदी का पानी अब नहाने योग्य नहीं रह गया है. अगर कभी आप इस नदीं में उतरते भी हैं तो इसके पानी से आंख तो भूलकर भी न धोएं, क्योंकि इससे उसकी रेटिना और कॉर्निया पर नकारात्मक असर पड़ना तय है.
इन दिनों इसमें इसमें फीकल कॉलीफॉर्म (बैक्टीरिया ) की मात्रा चरम पर है. वर्ष 2013-14 में इसमें फीकल कॉलीफार्म की मात्रा फतुहा-पटना ब्रिज के पास 1480 एमपीएन (मोस्ट प्रोबेल नंबर) मिलीलीटर प्रति सौ मिलीलीटर थी. वर्ष 2017-18 में बढ़ कर इस बैक्टीरिया की मात्रा 12433 हो गयी. बैक्टीरिया की यह मात्रा केवल इसी जगह नहीं, बल्कि रेलवे पुल के पास इसी अवधि के दौरान 640 से बढ़ कर 15100 एमपीएन व किंजर रोड पर 700 से बढ़ कर 9333 एमपीएन प्रति सौ मिलीलीटर हो गयी. फीकल कॉलीफाॅर्म की यह मात्रा बताती है कि यह पानी अब किसी भी कीमत पर नहाने योग्य नहीं रह गया है.
दरअसल ये फीकल कॉलीफॉर्म मल मूत्र में पाये जाते हैं. एक ही जगह पर यह भू जल को भी दूषित करते हैं. यह आंकड़े प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से किये गये एक विशेष सर्वेक्षण के संबंध में जारी किये गये हैं.
आंखों की कॉर्निया के लिए घातक, चर्म रोग की संभावना
कभी स्वच्छ पानी के लिए जानी जाती थी पुनपुन नदी : शहर के एकदम पास दक्षिणी-पूर्वी परिक्षेत्र में बह रही ये नदी कभी स्वच्छ पानी के लिए जानी जाती थी. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक रेलवे ब्रिज के पास वर्ष 2013-14 में इसमें डीओ (डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन) की मात्रा 7.6 मिग्रा रही. वर्ष 2017-18 में ये आंकड़ा बढ़कर 8.2 हो गया. जहां तक यहां के बीओडी का सवाल है, उसकी मात्रा 2.3 से बढ़कर 2.6 हो गयी. बीओडी की अधिकतम सीमा 1.4 मिलीग्राम होनी चाहिए. इससे भी भयावह स्थिति किंजर रोड ब्रिज के निकट है. फिलहाल इसमें जलीय जीवों का ठीक से सांस लेना भी कठिन हो गया है.
उसके पानी की पीएच वेल्यू लगातार बढ़ रही है. रेलवे पुल के निकट 7.87 से बढ़कर 7.89, किंजर के निकट 7. 93 से बढ़कर 8 हो गयी है. साफ जाहिर है कि इसके पानी में क्षारीयता बढ़ रही है. क्षारीयता की मात्रा वाला पानी आखों की कॉर्निया के लिए सबसे ज्यादा घातक है. इसके अलावा चर्म रोग की संभावना बढ़ जाती है.
एक्सपर्ट व्यू
निश्चित रूप से पुनपुन अब सामान्य तौर पर नहाने योग्य नहीं बची है. इसमें मल जल या सीवेज तेजी से बहाया जा रहा है. लिहाजा नदी के पानी की गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो चुकी है. यह स्वास्थ्य के लिए घातक है. फीकल कॉलीफार्म बैक्टीरिया की मात्रा में मात्र चार साल में कई सौ गुना इजाफा हैरत भरी बात है.
– डाॅ डीके पॉल, एक्सपर्ट जल संरक्षण व पर्यावरणविद, पटना विवि
