अनुज शर्मा
एफएसएल खरीद रही ऐसे उपकरण जो अदालतों में थ्रीडी तकनीक से क्राइम सीन क्रिएट कर सकेंगे
पटना : अपराधी कठघरे में खड़ा होगा. न्याय की कुर्सी पर बैठे जज साहब अपनी आंखों से वारदात होते हुए महसूस कर सकेंगे. सरकार राज्य की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को ऐसे उपकरण उपलब्ध कराने जा रही है, जिनकी मदद से अदालतों में थ्रीडी तकनीक से क्राइम सीन क्रिएट किये जा सकेंगे.
हमलावर ने फायर कितनी दूरी से किया, यह आसानी से पता चल जायेगा. इससे सबूतों के अभाव में अपराधी के रिहा होने के ग्राफ में कमी आयेगी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील उस समय खुद को असहाय पाते हैं, जब मौका-ए-वारदात और जांच में पाये गये प्रमाणों को जोड़ने वाली कोई एक कड़ी छूट जाती है. बचाव पक्ष के वकील इसका लाभ उठा लेते हैं. अदालतों के सामने सबूतों के अभाव खत्म करने को सरकार विधि विज्ञान प्रयोगशाला की भूमिका को बढ़ा रही है.
अपराधी ने वारदात को कैसे और कब अंजाम दिया होगा, थ्री डी स्कैनर कैमरा के जरिये यह कोर्ट में प्रदर्शित की जायेगी. 60 लाख की कीमत वाले इस उपकरण से क्राइम का विश्लेषण आसानी से किया जा सकता है. बैलोसिटी मेजरमेंट सिस्टम की भी खरीद की जा रही है. इससे पुलिस आसानी से पता कर लेगी कि गोली किस हथियार से चलायी गयी. उसकी मारक क्षमता कितनी है. यह सिस्टम यह सटीक जानकारी देगा कि गोली कितनी दूरी से चलायी गयी.
हादसे में भी करेगा मदद : थ्री डी स्कैनर कैमरा हादसों में भी मददगार साबित होगा. कहीं पर आग लग गयी है. इमारत में धुंआ भरने के कारण कोई आदमी नहीं घुस सकता है तो यह 360 एचडी इमेज देगा. इससे हादसे का मेजरमेंट कर बचाव कार्य में मदद मिलेगी.
थ्री डी स्कैनर कैमरा और बैलोसिटी मेजरमेंट सिस्टम से पुलिस की जांच को वैज्ञानिक आधार मिलेगा. इनकी मदद से जुटाये गये साक्ष्य से अपराधी का बचना आसान नहीं होगा. चार थ्री डी स्कैनर कैमरा और बैलोसिटी मेजरमेंट सिस्टम की खरीद हो रही है.
दास अशोक, निदेशक, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी पटना
