मूक-बधिर महिला का आधार कार्ड से पुनर्वासन
पटना : गुरुवार को उत्तर रक्षा गृह, गायघाट में रह रही मूक-बधिर महिला अंशु कुमारी के जीवन में खुशियां फिर से लौट आयी, जब उसे उसके माता-पिता से मिलवा कर पुनर्वासित करवाया गया. उत्तर रक्षा गृह की अधीक्षिका वंदना गुप्ता ने बताया कि इस महिला को 2016 में गृह में लाया गया एवं इसका नाम निहारिका रखा गया था.
मूक बधिर व अशिक्षित होने की वजह से ये कुछ भी बता पाने में असमर्थ थी. सामाजिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के सहयोग से आधार के जरिये पुनर्वासन का कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा संपोषित सभी बाल एवं महिला गृहों में आधार पंजीकरण करवाया जा रहा है. चूंकि आधार बायोमेट्रिक आधारित प्रणाली है, अतः एक व्यक्ति का आधार दुबारा नहीं बन सकता.
इस मामले में भी वही हुआ, आधार पंजीकरण के बाद उसका आवेदन निरस्त हो गया और पता चला कि महिला का आधार पहले से ही बन चुका है. इ-आधार डाउनलोड करने पर मालूम हुआ कि उसका
मूल नाम अंशु कुमारी है और घर का पता सहरसा का मिला. स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उसके माता पिता को ढूंढा गया एवं कागजी कार्रवाई के बाद गुरुवार को महिला को परिवार के हवाले कर दिया गया.
प्रदेश का पहला मामला
पूरी तरह मूक बधिर महिला का आधार के माध्यम से परिवार से मिलाने का बिहार में यह पहला मामला है. इस अवसर पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अधिकारी प्रभात कुमार एवं आशीष कुमार ने कहा कि आधार सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के साथ साथ भूले-बिछड़े लोगों को अपने परिवार से मिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बशर्ते उनका आधार पहले से ही बना हुआ हो.
सारण एवं पटना के बाल गृहों में रह रहे बच्चों को भी आधार के जरिये मिलवाया गया है. अगर सभी निवासियों का आधार बना रहे तो कोई भी अपने परिवार से बिछड़ा नहीं रहेगा, सबका पुनर्वासन सुनिश्चित किया जा सकेगा.
