ड्राइविंग सीट पर बैठते स्कूली बच्चे, पर चालक को चिंता नहीं

पटना: स्कूलों में चलने वाले वाहन के चालक ने मनमाफिक किराया तो बढ़ा लिया, लेकिन ओवरलोडिंग करने से बाज नहीं आ रहे हैं. ड्राइविंग सीट से लेकर पीछे तक क्षमता से अधिक बच्चे बिठाये जा रहे हैं. हद तो तब होती है, जब ड्राइविंग सीट पर तीन से चार बच्चे बैठे रहते हैं. लगता है […]

पटना: स्कूलों में चलने वाले वाहन के चालक ने मनमाफिक किराया तो बढ़ा लिया, लेकिन ओवरलोडिंग करने से बाज नहीं आ रहे हैं. ड्राइविंग सीट से लेकर पीछे तक क्षमता से अधिक बच्चे बिठाये जा रहे हैं. हद तो तब होती है, जब ड्राइविंग सीट पर तीन से चार बच्चे बैठे रहते हैं. लगता है कि वाहन चालक को बच्चों के जान की परवाह नहीं है. ऑटो हो या वैन सभी में बच्चों को भेड़-बकरी की तरह ठूंस कर ले जाया जाता है.

अकस्मात किसी तरह की घटना हो जाये तो आगे के बच्चे अधिक प्रभावित होंगे. ड्राइविंग सीट पर बच्चों को नहीं बिठाने का प्रशासन को आश्वासन देने के बाद भी चालक अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे हैं.

स्कूली वाहन में ओवरलोड नहीं करने के एवज में चालक ने प्रशासन की अनुमति बगैर मनमाफिक किराया बढ़ा दिया. किराया बढ़ाने का काम चालक अपनी मरजी से किये. दूरी के अनुसार पहले से तय किराया को दुगुना कर दिया गया. इससे अभिभावकों की परेशानी बढ़ गयी है.

क्षमता से अधिक बच्चे बिठाते हैं : विक्रम, पीयाजीओ, टेंपू, मारुति वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बिठाये जा रहे हैं. इसके लिए चालक ने अपने ढंग से वाहन के अंदर कंस्ट्रक्शन में परिवर्तन कर लिया है, जो मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार गलत है. तीन सीट की क्षमता वाले टेंपू में आठ से दस बच्चे बिठाये जाते हैं. चार सीट की क्षमता वाले मारुति वैन में 12 से 15 बच्चे बैठते हैं. स्कूल में चलने वाले बसों की भी यही स्थिति है. अभिभावक की मजबूरी का स्कूली वाहन चालक खूब फायदा उठा रहे हैं. सामने में उनके बच्चे भेड़-बकरी की तरह ठूंस कर जा रहे हैं. इसके बावजूद कुछ भी बोलने से परहेज करते हैं. अगर वे आवाज उठाते हैं तो चालक को यह कहने में देर नहीं लगती की कोई और व्यवस्था कर लीजिए.

ओवरलोड के खिलाफ अभियान : स्कूली वाहन में ओवरलोड के खलाफ अभियान चलाया जाता है. इसके खिलाफ चालकों ने कुछ दिन परिचालन ठप रखा था. बाद में ऑटो चालक संघ के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ बात कर किराया बढ़ाने के बाद ओवरलोड नहीं करने का आश्वासन दिया था. साथ ही ड्राइविंग सीट पर किसी भी हालत में बच्चे को नहीं बिठाने की बात कही गयी थी. इस संबंध में डीटीओ दिनेश कुमार राय कहते हैं कि स्कूली वाहन में ओवरलोड के खिलाफ कार्रवाई होगी. ड्राइविंग सीट पर बच्चों को नहीं बिठाना है. जांच में ड्राइविंग सीट पर बच्चे पाये गये, तो डीएल के साथ वाहन का निबंधन भी रद्द होगा.

नॉर्म्स के पालन के लिए भेजा नोटिस : स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए बस में सभी नॉर्म्स का पालन करने के लिए आरटीए ने स्कूल को नोटिस भेजा है. भेजे गये नोटिस में स्कूल को इस बात से अवगत कराया गया है कि उसके स्कूल में चलने वाले बस में नॉर्म्स का पालन हो रहा है या नहीं. स्कूल ने अब तक आरटीए को जवाब नहीं भेजा गया है. नॉर्म्स के तहत स्कूल बसों को फस्र्ट एड बॉक्स, वाटर टैंक , बैग हुक, ओवरलोड नहीं करने सहित कई आवश्यक चीजों पर ध्यान देना है. आरटीए सचिव ईश्वर चंद्र सिन्हा ने बताया कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों को आवश्यक कदम उठाना जरूरी है.

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