नालंदा, नवादा, शेखपुरा से लौटकर विजय सिंह
खेतों में अब सिर्फ गेहूं, सरसों की फसलें ही नहीं उगतीं, बल्कि साइबर क्रिमिनलों के पौधे भी उगने लगे हैं. यह बात सुनने में जरूर अटपटी लगेगी, लेकिन कमोवेश यही स्थिति है. जी हां, सूबे के तीन जिलों की चौहद्दी में बसे गांव और यहां बसने वाले साइबर क्रिमिनल रुपयों की फसल काट रहे हैं.
प्रभात खबर की पड़ताल में तमाम चौंकाने वाली जानकारियां हाथ लगी हैं. नालंदा, नवादा और शेखपुरा जिले के सीमाई इलाके में मौजूद 13 ऐसे गांव हैं जहां दिन की शुरुआत साइबर क्राइम के खेल से होती है. ये गांव 20-25 किलोमीटर की चौहदी में बसे हैं. एक गांव में कम से कम आधा दर्जन गैंग सक्रिय हैं जिन्हें क्रिमिनल अपनी भाषा में कंपनी बोलते हैं और एक कंपनी में करीब 20 सदस्य काम करते हैं. इस तरह से एक अनुमानित तौर पर देखा जाये तो 13 गांवों में 78 गैंग और 1560 सदस्य ठगी की फसल काट रहे हैं.
ठगी के ऐसे मामलों की पड़ताल और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रभात खबर आज से एक शृंखला शुरू कर रहा है. पढ़िए आज इसकी पहली कड़ी.
हाथ में कागज, कान पर मोबाइल है तो समझिए जारी है खेल
गांव के बाहर मौजूद बंसवारी, बागीचा साइबर क्रिमिनलों का अड्डा है, यहां पर ठगी के सामान सजाये जाते हैं और खेतों में टहल कर गैंग के सदस्य फोन पर लोगों को झांसे में लेते हैं. फोन पर बात करने वालों के हाथ में एक मोबाइल फोन और एक कागज का टुकड़ा होता है. प्रभात खबर की पड़ताल में देखा गया कि खेतों में नये लड़कों का झुंड हाथ में कागज का टुकड़ा लेकर बात कर रहा है. इस पर ऑनलाइन खरीदारी करने वालों का पूरा डिटेल रहता है.
फोन रिसीव होते ही गैंग के सदस्य सबसे पहले खुद को किसी कंपनी के अधिकारी बताते हैं. फिर फोन रिसीव करने वाले का नाम-पता बताते हैं, इससे लोग झांसे में आ जाते हैं. इसके बाद स्कीम के बारे में जानकारी दी जाती है और अपने उच्च अधिकारी (बगल में बैठे गैंग सरगना) से बात कराने की बात कह कर काॅल को ट्रांसफर भी किया जाता है. झांसे में आने पर तत्काल फर्जी नाम-पते पर बने बैंक एकाउंट में पैसा मंगा लिया जाता है.
मुठ्ठी गर्म करके लोकल थानों की आंख पर बांध दी है पट्टी
साइबर क्राइम का प्लेटफॉर्म बनकर जिस तरह से ये गांव उभर रहे हैं, उससे यह साफ है कि इन इलाकों की पुलिस की आंखों पर पट्टी बांध दी गयी है. क्रिमिनलों ने ऐसी सेटिंग की है कि छापेमारी से पहले सूचना लीक हो जाती है और क्रिमिनल अपना सामान समेट लेते हैं. सीधे तौर पर यहां पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
