पटना : राज्य सरकार ने कर्मियों को पेंशन देने से संबंधित नियम में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत अगर किसी सरकारी कर्मचारी पर कोई विभागीय कार्रवाई चलती है और इसी क्रम में वह रिटायर्ड हो जाते हैं, तो उन्हें पेंशन का लाभ उस समय तक नहीं मिलेगा, जब तक विभागीय जांच पूरी नहीं हो जाती है.
विभागीय कार्रवाई के अंतिम निष्कर्ष निकलने तक संबंधित कर्मी की पेंशन रुकी रहेगी. किसी कर्मचारी पर विभागीय या किसी तरह की न्यायिक कार्रवाई भी चलती रहेगी, तब भी दोनों स्थिति में यह नियम समान रूप से लागू होगा. वित्त विभाग ने बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 में संशोधन करते हुए इसमें एक नया प्रावधान शामिल कर दिया है.
यह नियम सभी स्तर के सरकारी सेवकों पर समान रूप से लागू होगा. हालांकि इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन सरकारी सेवकों पर बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण और अपील नियमावली, 2005 के तहत कार्रवाई चल रही है, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा. ऐसे कर्मियों की पेंशन शुरू हो जायेगी. हालांकि, अगर जांच के बाद किसी तरह का आर्थिक दंड लगता है, तो उसकी कटौती पेंशन से होगी. वित्त विभाग ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है.
पेंशन से संबंधित अब तक के नियम के अनुसार अगर किसी सरकारी कर्मी पर किसी तरह की कार्रवाई चलती रहती और इसी बीच वह रिटायर्ड हो जाते थे, तो उनकी पेंशन और सेवांत लाभ समेत तमाम सुविधाएं मिलने लगती थीं. परंतु अब इस नये प्रावधान से इस पर रोक लग गयी है.
