पटना : चंंपारण सत्याग्रह में गांधी जी के अन्यतम सहयोगी रहे ब्रजकिशोर प्रसाद न केवल वकील के रूप में चंपारण के किसानों की सहायता करते रहे, बल्कि स्त्रियों में शिक्षा के प्रचार एवं पर्दा प्रथा को तोड़ने के लिए आजीवन संघर्ष किया और इस काम में अपनी बेटी प्रभावती को भी लगाया.
बिहार विद्यापीठ की ओर से आयोजित ब्रजकिशोर प्रसाद जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए विद्यापीठ के अध्यक्ष विजय प्रकाश ने कहा कि बिहार विद्यापीठ के प्रथम उपकुलपति ब्रजकिशोर बाबू के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए वे प्रयत्नशील हैं.
इस अवसर पर विद्यापीठ की मंत्री डॉ तारा सिन्हा ने कहा कि ब्रजकिशोर बाबू ने ही सर्वप्रथम राजकुमार शुल्क के साथ जाकर लखनऊ कांग्रेस में चंपारण के किसानों पर हो रहे अत्याचार का मामला उठाया था.
बिहार विद्यापीठ के सांस्कृतिक मंत्री डॉ शिववंश पांडेय ने कहा कि नीलहों द्वारा चंपारण के किसानों पर जो अत्याचार किया जा रहा था उसे मिटाने के लिए ब्रजकिशोर बाबू न्यायालय से विधान परिषद तक लड़ते रहे थे. इस अवसर पर जेपी मिश्र, निशिकांत मिश्र समेत उपस्थित सभी लोगों ने ब्रजकिशोर प्रसाद को श्रद्धासुमन अर्पित किये. इस अवसर पर विद्यापीठ में विकसित बिहार पर एक आकर्षक और ज्ञानप्रद प्रदर्शनी लगायी गयी.
पटना : श्री ब्रजकिशोर स्मारक प्रतिष्ठान, सदाकत आश्रम द्वारा सोमवार को ब्रजकिशोर बाबू की 143वीं जयंती पर आयोजित समारोह में गांधीवादी चिंतक अमरनाथ भाई ने ब्रजकिशोर बाबू के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि ब्रजकिशोर बाबू ने चंपारण सत्याग्रह में मुख्य भूमिका निभायी थी.
वे किसानों के दुख-दर्द को गांधी जी के पास पहुंचाने में सफल रहे थे. इस अवसर पर अपने कार्यक्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए चार व्यक्तियों को ब्रजकिशोर सम्मान दिया गया. इसके अंतर्गत पांच हजार नकद, स्मृति चिन्ह और प्रशस्तिपत्र दिया गया.
