पटना : सिस्टम से नाराजगी का चेहरा बने टुन्नू मियां और रविदास

अनुज शर्मा पटना : राजधानी से करीब 35 किमी दूर ग्राम पंचायत बारा के गांव सलारपुर में टुन्नू मियां और शिव गाेविंद रविदास सरकार और सिस्टम दोनों से नाराज ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. टुन्नू मियां का घर पक्का है. रविदास की फूस की झोंपड़ी है. गांव के लिए करीब 15 साल पहले सड़क […]

अनुज शर्मा
पटना : राजधानी से करीब 35 किमी दूर ग्राम पंचायत बारा के गांव सलारपुर में टुन्नू मियां और शिव गाेविंद रविदास सरकार और सिस्टम दोनों से नाराज ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. टुन्नू मियां का घर पक्का है.
रविदास की फूस की झोंपड़ी है. गांव के लिए करीब 15 साल पहले सड़क मंजूर हुई थी. इस डगर (संपर्क मार्ग) के न बनने से ग्रामीणों की जिंदगी जो डगमगायी है उससे जनप्रतिनिधियों के प्रति विश्वास ही डिगा दिया है. इससे नाराज ग्रामीणों ने चुनाव में भाग न लेने की घोषणा कर दी है. ग्रामीणों ने गांव में बैनर भी टांग दिया है. बैनर का एक छोर टुन्नू मियां तो दूसरा शिव गोविंद के घर की मुंडेर पर ही टिका है.
दो दिशाओं से पुनपुन नदी से घिरे नौबतपुर ब्लाॅक के गांव सलारपुर में 1000 वोटर हैं. अस्सी फीसदी लोग मजदूर हैं. काम करने पटना तक आते हैं.
सरजू महतो, राकेश पासवान, जोगेश्वर पासवान बताते हैं कि वे लोग आठ महीने नियमित मजदूरी कर 12 महीने की जिंदगी का सामान जुटाने को विवश हैं. चार महीने काम के लिए बाहर जाने से बचते हैं. इसकी वजह गांव में सड़क का न होना है. बरसात में मसौढ़ी तक का रास्ता पुनपुन नदी का उफान रोक देता है. कच्चा रास्ता इस लायक नहीं बचता कि उस पर साइकिल भी चल सके.
पटना आने काे नौबतपुर आना पड़ता है. नौबतपुर से वाहन पकड़ने के लिए तीन किमी से अधिक पैदल चलना पड़ता है. यह रोड बन जाये तो आसपास के गांवों के 50 हजार लोगों की जिंदगी बदले. विकास गांव तक पहुंचे.
पटना : केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री रामकृपाल के लोकसभा क्षेत्र और कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ शर्मा के विधानसभा क्षेत्र में आने वाले सलारपुर के लोगों ने चार महीने पहले गांव की पंचायत बुलायी थी. पंचायत में निर्णय लिया गया कि रोड नहीं बनेगी गांव वाले वोट नहीं करेंगे.
विवाद-भ्रष्टाचार में 15 साल से अटका
सलारपुर के लोग जिस संपर्क मार्ग के लिए आंदोलित हैं वह पीएमजीएसवाइ की फाइल में तरारी-बारा-सलारपुर रोड है. यह छह किमी लंबा है. करीब चार करोड़ की लागत वाला यह मार्ग 2004-05 में स्वीकृत हुआ था.
अगस्टा कंस्ट्रक्शन को इसका निर्माण करना था. मिट्टी भराई का काम हो गया था. सौ ट्रक गिट्टी भी पड़ गयी थी. इसी बीच कंपनी और पीएमजीएसवाइ के कार्यपालक अभियंता से विवाद हो गया. कंपनी कोर्ट में चली गयी. केस हारने पर वह करीब एक करोड़ की संपत्ति उठाने भी नहीं आयी. ग्रामीण विकास मंत्री के प्रयास से एस्टीमेट दोबारा बना, लेकिन क्वालिटी कंट्रोल विंग की निगेटिव रिपोर्ट से मामला फिर अटक गया.
बोले प्रतिनिधि
हमारा गांव दलितों का गांव है. 15 साल से रोड भ्रष्टाचार-सरकारी फाइलों में ऐसी उलझी कि ठेकेदार लाखों का सामान छोड़कर भाग गया. सांसद और विधायक इसमें रुचि लें तो काम बने.
सुनील कुमार , पूर्व वार्ड सदस्य
सड़क के लिए आयी गिट्टियों के ढेर पर उगे बबूल के पेड़ कच्चे रास्ते को भी बाधित कर रहे हैं. जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में रुचि नहीं दिखायी. वहीं, आसपास के कई गांवों के लिए तीन-तीन रोड बन चुकी है.
सतेंद्र पासवान, वर्तमान वार्ड सदस्य

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