पटना : गहने पर हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को लेकर संशय बना हुआ है. जून, 2018 में केंद्र सरकार ने सोने व चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग के लिए गाइड लाइन जारी किये थे. लेकिन, इस बारे में फैसला अभी तक सरकार के स्तर पर लंबित है. ज्ञात हो कि सरकार ने जनवरी, 2019 में गहने पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने की बात कहीं. लेकिन, इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है. प्रदेश में अब तक 765 ज्वेलर्स ने हॉलमार्किंग के लिए निबंधन कराया है. इनमें 335 ज्वेलर्स पटना जिले के हैं. वहीं, 20 हॉलमार्किंग सेंटर राज्य में हैं.
अधिकारियों की मानें, तो हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का फैसला फिलहाल होने की संभावना कम है. सरकार इस पर फैसला चुनाव के बाद ही लेगी. क्योंकि, सरकार सर्राफा कारोबारियों को नाराज नहीं करना चाहती है. सूत्रों के अनुसार 14, 18 और 22 कैरेट के तीन श्रेणियों में हॉलमार्किंग की अनुमति दी जायेगी. साथ ही हॉलमार्क वाले हर गहने के लिए विशेष पहचान नंबर देने के प्रस्ताव पर भी मंथन चल रहा है. बीआइएस कानून-2016 और बीआइएस नियमन-2018 से केंद्र सरकार को बीआइएस हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का अधिकार दिया गया है.
मामला सरकार के स्तर पर
गहने पर हॉलमार्किंग अनिवार्य करने को लेकर गाइड लाइन तैयार है. लेकिन, निर्णय सरकार के स्तर पर होना है. इसलिए हॉलमार्किंग कब से अनिवार्य होगा यह बताना संभव नहीं है.
एमके प्रमाणिक, वैज्ञानिक प्रमुख, भारतीय मानक ब्यूरो, पटना कार्यालय
मानक हॉलमार्किंग सेंटर से हो
हॉलमार्किंग की जो मानक की प्रमाणिकता है, वह हॉलमार्किंग सेंटर द्वारा की जाती है. ऐसे में भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से तय किये गये नियम के अनुसार ज्वेलर्स को मानक से कम शुद्धता आने पर ज्वेलर्स के बजाये हॉलमार्किंग सेंटर की होनी चाहिए.
विनोद कुमार, अध्यक्ष, पाटलिपुत्र सर्राफा संघ
