पटना : प्रदेश में रबी फसल को सिंचाई का पानी उपलब्ध करवाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नहरों से पानी नहीं मिलने से खेती प्रभावित हो रही है. इस कारण करीब 16 जिलों में गेहूं की सिंचाई के लिए स्थानीय किसान वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं.
ऐसे में उन्हें फसल की लागत बढ़ने की चिंता सताने लगी है. जल संसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस समय औरंगाबाद, गया, अरवल, पटना, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, सीवान, सारण और गोपालगंज जिले में रबी फसल को नहरों से सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है.इन जिलों में अधिकतर जगह गेहूं का दो बार पटवन किया जा चुका है, वहीं फिलहाल दो से तीन बार फिरसे पटवन की आवश्यकता बतायी जा रही है.
प्रदेश के 30 लाख हेक्टेयर में होनी है रबी की खेती
कृषि विभाग ने इस साल 23 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती का लक्ष्य तय किया है. जबकि, प्रदेश में 30 लाख हेक्टेयर में रबी की खेती की गयी है. पिछले रबी के मौसम में 21.01 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई थी. 61.04 लाख टन उत्पादन हुआ था. औसतन प्रति हेक्टेयर में 29.05 क्विंटल की दर से गेहूं का उत्पादन हुआ था. इसी प्रकार 4.56 लाख हेक्टेयर में मक्का की खेती हुई थी और 28.85 लाख टन उत्पादन हुआ था.
पहले ही दी जा चुकी थी सूचना
जल संसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि कुछ जगह नदी में पानी की कमी होने और कुछ स्थानों पर नहरों की मरम्मत होने से सिंचाई का पानी नहीं मिलने संबंधी सूचना बीते 20 दिसंबर को ही संबंधित जिले के किसानों को दे दी गयी थी. इसके तहत पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर और गंडक नहर प्रणाली का मरम्मत होना था. इससे सारण मुख्य नहर व उससे संबंधित वितरणियों में भी जलस्राव बंद कर दिया गया था.
