क्राइम रोकने के लिए बिहार की झोली में मात्र पांच लाख रुपये, यूपी को 65 लाख
पटना : राज्य में भले ही साइबर अपराध की संख्या बढ़ती जा रही हो पर, केंद्र सरकार से इसे निबटने के लिए जो राशि मुहैया करायी जा रही वह यूपी, राजस्थान, तमिलनाडू, महाराष्ट्र से भी कम है. कैपेसिटी बिल्डिंग और ट्रेनिंग के लिए 2017-18 में बिहार सरकार को मात्र पांच लाख रुपये आवंटितहुआ है,
जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को 64.85 लाख, तमिलनाडु को 57.50 लाख और महाराष्ट्र को 52.40 लाख रुपये दिये गये हैं. छोटे से राज्य झारखंड तक को 21,92,500 रुपये दे दिये गये हैं. केंद्र के इस रवैये से सवाल खड़े होने लाजिमी है. इसके बाद अगले साल की राशि राज्य को नहीं मिल पायी है.
नाकाफी हैं पांच लाख रुपये
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने सीसीपीडब्ल्यू स्कीम के तहत बिहार सरकार को पांच लाख रुपये दिये हैं. भारत सरकार ने निर्देशित किया है कि इस राशि का उपयोग पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और न्यायिक अभियोजकों को प्रशिक्षण देने पर करना है. बिहार सरकार साइबर अपराध को लेकर युद्धस्तर पर काम छेड़ा है. बिहार सरकार जानती है कि साइबर अपराध से निबटने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है. इसलिए इस काम में सरकारी मशीनरी के साथ ही आम लोगों को भी शामिल किया गया है. ऐसे प्रशिक्षण का दायरा कई गुना बढ़ा है. खास बात यह है कि अन्य राज्यों पर केंद्र सरकार ने मेहरबानी की है. वह मेहरबानी ऐसे राज्यों पर हुई है, जो पहले ही बिहार से कई गुना बेहतर स्थिति में हैं.
बिहार की रैंक देश में 26वीं
एनसीआरबी की रिपोर्ट की मानें तो साइबर अपराध में बिहार का स्थान देश में 26वां है. पहले स्थान पर असम है. दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र, तीसरे स्थान पर कर्नाटक है. देश की राजधानी दिल्ली 19वें स्थान पर है. साइबर अपराध के जरिए यौन शोषण से जुड़े छह मामले वर्ष 2016 में बिहार में दर्ज किये गये थे. असम में 41, गुजरात में 28, कर्नाटक में 41, महाराष्ट्र में 144 और उत्तर प्रदेश में 138 मामले सामने आये थे. बिहार में वर्ष 2016 में कुल 309 मामले दर्ज हुए.
अन्य राज्यों पर केंद्र मेहरबान
आंध्र प्रदेश 36,50,000
असम 12,70,000
छत्तीसगढ़ 17,10,000
गुजरात 29,90,000
हरियाणा 11,37,500
कर्नाटक 40,10,000
झारखंड 21,92,500
ओडिसा 19,82,500
उ. प्रदेश 64,85,000
राजस्थान 35,07,500
तेलंगाना 27,95,000
पश्चिम बंगाल 25,75,000
