अब तिराहे पर उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति, गरमायी बिहार की सियासत

-मणिकांत ठाकुर एनडीए से रालोसपा के अलग होने के बाद गरमायी बिहार की सियासत कुशवाहा ने खुद को ज्यादा आंक लिया वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर का कहना है कि एनडीए से अलग होने की रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की घोषणा आश्चर्यजनक राजनीतिक घटना नहीं है. कुशवाहा ने अपने राजनीतिक भविष्य का तीन फॉर्मूला दिया है. […]

-मणिकांत ठाकुर
एनडीए से रालोसपा के अलग होने के बाद गरमायी बिहार की सियासत
कुशवाहा ने खुद को ज्यादा आंक लिया
वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर का कहना है कि एनडीए से अलग होने की रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की घोषणा आश्चर्यजनक राजनीतिक घटना नहीं है. कुशवाहा ने अपने राजनीतिक भविष्य का तीन फॉर्मूला दिया है. लेकिन, अब वक्त उनके साथ नहीं है, इनके पीछे अब कौन दिमाग लगायेगा कि वह क्या सोचते हैं. उपेंद्र कुशवाहा खुद की राजनीति में उलझते चले गये हैं.
उन्होंने अपने वजन को ज्यादा आंक लिया या चाहते रहे कि लोग उनको अधिक वजनदार समझें. इस तरह के भ्रम में वह जितना डूबते गये लोग उनको छोड़ते चले गये. उन्होंने एक खास समुदाय की राजनीति में अपने को सीमित कर लिया. वह भी उस समुदाय के बीच जिनका हमेशा मत विभाजन होता रहा है. उपेंद्र कुशवाहा कह रहे हैं कि वह एनडीए को नुकसान पहुंचाएंगे.
…चुनाव के समय में क्या हालात बदल जायेगा इसे कौन जानता है. एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा के रहने की गुंजाइश
उस समय समाप्त हो गयी थी, जब भाजपा और जदयू ने लोकसभा की बराबर-बराबर सीटों की घोषणा की थी. एनडीए के इन दोनों दलों ने यह सोच लिया था कि उपेंद्र जाएं तो जाएं. इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है.

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