पटना : प्रदेश में ठंड की शुरुआत हो चुकी है. यह बढ़ने लगी है, लेकिन इससे सुरक्षा के लिए अलाव और रैनबसेरों के रूप में सरकारी इंतजाम का लोगों को अभी इंतजार करना होगा. इसका कारण यह है कि सरकार के जारी मानक स्तर पर ठंड अभी नहीं पहुंची है.
सूत्रों का कहना है कि ठंड को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा गया है. इसलिए इसके लिए जरूरी दिशा निर्देश राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग जारी करता है. विभाग के निर्देश पर सभी जिला अधिकारी इस संबंध में कार्रवाई करते हैं.
पिछले साल 29 नवंबर को दिये गये थे निर्देश : पिछले साल 29 नवंबर को ही आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को ठंड से बचाव के लिए पुख्ता बंदोबस्तकरने का निर्देश जारी कर दिया था. वहीं, गरीबों और बेसहारों कीसुरक्षा के लिए सरकारी मशीनरी अभी ठंड बढ़ने का इंतजार कर रही है. इसलिए उनके लिए अलाव और रैनबसेरों का इंतजाम अब तक नहीं हो सका है.
क्या है ठंड का मानक
आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जिन इलाकों का सामान्य न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो वहां यदि न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस से कम हो जाये तो उसे ठंड प्रभावित माना जाता है.
इसके साथ ही किसी क्षेत्र में यदि तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से कम हो जाये और यह रबी या खरीफ फसल के मौसम में उस क्षेत्र विशेष के लिए असामान्य स्थिति हो, तब उस क्षेत्र को पाला प्रभावित माना जायेगा. राज्य में किसी जिले को शीतलहर या पाला प्रभावित मानने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा निर्गत तापमान आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिया जाता है.
