पटना : राज्य में विश्वविद्यालयों की स्थिति को सुधारने के अलावा प्रशासनिक और वित्तीय अनुशासन को बनाये रखने के लिए राज्यपाल लालजी टंडन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई. इसमें विश्वविद्यालय प्रशासनिक सेवा और विश्वविद्यालय वित्त सेवा का गठन जल्द करने पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया. इसकी मुख्य वजह विश्वविद्यालय में कुलसचिव, वित्त परामर्शी और वित्त पदाधिकारी के पदों पर नये स्तर से पदाधिकारियों की बहाली हो सके. वर्तमान में इन पदों पर अधिकतर सेवानिवृत्त अधिकारियों की ही नियुक्ति होती है.
समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि ये सेवानिवृत्त अधिकारी प्रशासनिक और वित्तीय अनुशासन को नियमित रूप से बहाल रखने और संतोषजनक स्थिति को बनाये रखने में बहुत सक्षम साबित नहीं हो पाते.
ये अपना दायित्व बहुत संतोषजनक रूप से नहीं निभा पाते हैं. ऐसे में नये स्तर से इन पदों पर बहाली होनी चाहिए. इन पदों पर बहाली के लिए सेवा का गठन करना अनिवार्य होगा. इन सेवाओं के तहत नये पद की श्रृंखला को नये स्तर से तैयार करने और पद का सृजन करने से संबंधित सभी जरूरी कार्रवाई करने के लिए शिक्षा विभाग को जल्द ही जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. बैठक के दौरान गंभीरतापूर्वक इस बात पर विचार किया गया कि इस दोनों सेवाओं का गठन जल्द कैसे किया जाये. इसके लिए सभी स्तर पर तैयारी करने से संबंधित तमाम बातों की भी समीक्षा की गयी.
इस दौरान राज्यपाल ने बारी-बारी से सभी विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक भी बुलाने की बात कही. इसी क्रम में 7 दिसंबर को मुंगेर विश्वविद्यालय की पहली समीक्षा बैठक आयोजित की गयी है. इसमें इस नवस्थापित विश्वविद्यालय की जरूरतों, क्रिया-कलापों और भावी कार्य योजनाओं समेत अन्य मुद्दों पर व्यापक समीक्षा की जायेगी. बैठक के दौरान इस बात की भी चर्चा की गयी कि राज्यपाल सचिवालय में तैनात कर्मियों का हाल में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जो ट्रांसफर किया गया है, उसके अनुसार सभी कर्मियों को जल्द ही नये स्थान पर ज्वाइन करने को कहा गया.
इस उच्चस्तरीय बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, वित्त विभाग के अपर सचिव, उच्च शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल सिंह, विधि सचिव आदि मौजूद थे.
