पटना : बिना एनओसी करोड़ों की लागत से खोदे गये कमाई¹ के नाले बने सिरदर्द

पटना : निगम क्षेत्र में बने नालों की अजब ‘लीला’ है. नाला निर्माण करने का ठेका तमाम एजेंसियां लेती हैं, लेकिन वे एजेंसियां उसके मेंटेनेंस की जवाबदेही बिल्कुल नहीं लेतीं. हैरत की बात यह है कि उन नालों का निर्माण तकनीकी तौर पर कितना सही है, इसकी गुणवत्ता की जांच भी कभी नहीं करायी जाती. […]

पटना : निगम क्षेत्र में बने नालों की अजब ‘लीला’ है. नाला निर्माण करने का ठेका तमाम एजेंसियां लेती हैं, लेकिन वे एजेंसियां उसके मेंटेनेंस की जवाबदेही बिल्कुल नहीं लेतीं. हैरत की बात यह है कि उन नालों का निर्माण तकनीकी तौर पर कितना सही है, इसकी गुणवत्ता की जांच भी कभी नहीं करायी जाती. ये नाले उपयोगी साबित होने की बजाय उल्टे मुसीबत की वजह बन जाते हैं. कुल मिला कर शहर में करोड़ों की लागत से बने ऐसे तमाम नाले हैं, जिनका मेंटेनेस कभी नहीं हुआ़ बात साफ है कि ये नाले केवल पैसा बनाने के लिए खोद दिये गये. यही वजह है कि जब भी दीपक जैसे मासूमों के गिरने जैसी घटनाएं सामने आतीं हैं तो रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाली एजेंसियां अंधेरे में ही तीर मारती नजर आती हैं.
साफ-सफाई व रखरखाव भगवान भरोसे : जानकारों के मुताबिक
जिन एजेंसियों ने नाला निर्माण
कराया है, उन्होंने एनओसी भी नहीं ली. जबकि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले निगम से एनओसी लेना जरूरी है. दर्जनों नाले बना दिये गये, लेकिनइनकी औपचारिक सूचना निगम प्रशासन को नहीं दी गयी है. नाला निर्माण के बाद बरसात के मौसम से पहले सफाई के दौरान पता चलता है कि यह भी नाला है.
निगम के चारों अंचलों में छोटे-बड़े दर्जनों नाले हैं, जिनका निर्माण डूडा, बूडा, बुडको व पुल निर्माण निगम ने कराया है. इन नाले के बने दो-चार वर्ष बीत गये. लेकिन, निर्माण एजेंसियां द्वारा काम पूरा करने के बाद निगम को हैंड ओवर नहीं किया गया है. नाला हैंड ओवर नहीं होने की स्थिति में साफ-सफाई व रखरखाव भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है. जर्जर व खुले नाले तब याद आते हैं, जब दुर्घटनाएं होती हैं.
आशियाना-दीघा नाला नहीं हुआ हैंड ओवरआशियाना-दीघा रोड के किनारे बड़ा खुला नाला था, जिसे ढक कर सड़क
बनाने की योजना बनायी गयी. पुल निर्माण निगम ने योजना पर काम करते हुए
बड़ा भूगर्भ नाला बनाया. इस नाले के ऊपर सड़क बनायी गयी. इससे आशियाना-दीघा रोड राजाबाजार से राजीव नगर पुल तक फोर लेन सड़क हो गयी है. दो वर्ष पहले नाला व सड़क बन कर तैयार हो गयी. लेकिन, अब तक आशियाना-दीघा नाला निगम को न हैंड आेवर किया गया और न ही साफ-सफाई व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी तय की गयी.
संपहाउस के आउट फाॅल नाले का रखरखाव नहीं
नगर आवास विकास विभाग ने एसपी वर्मा रोड स्थित संप हाउस से आउट फॉल नाला बनाने की योजना बनायी. इस योजना को पूरा करने की जिम्मेदारी बिहार अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) को दी गयी. बुडको प्रशासन ने एसपी वर्मा से फ्रेजर रोड, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति रोड, बुद्ध मार्ग होते हुए मंदिरी नाले में मिलाया गया. यह नाला भी दो-ढाई वर्ष पहले बनाया गया है. लेकिन, अब तक निगम को हैंड ओवर नहीं किया गया है.
अक्सर आपात स्थिति में ही खोजी जाती है नाले की डिजाइन आशियाना-दीघा नाला हो याफिर एसपी वर्मा रोड स्थित संप हाउस से निकले आउट फॉलनाले की डिजाइन व नक्शा निगम प्रशासन के पास नहीं है. वहीं, नाले के ऊपर बनाये गये चेंबर की भी जानकारी नहीं है. ऐसा लगता है मानों इन दोनों नालों में भी
यदि दुर्घटना होगी, तब जाकर डिजाइन व नक्शे की खोजबीन शुरू की जायेगी.

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