पटना : अधिवक्ता परिषद ने मनाया संविधान दिवस

पटना : अधिवक्ता परिषद की महानगर शाखा पटना उच्च न्यायालय के तत्वावधान में सोमवार को संविधान दिवस मनाया गया. इस अवसर पर परिषद की ओर से बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में ‘प्रजातांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका’ विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश व चाणक्य विधि […]

पटना : अधिवक्ता परिषद की महानगर शाखा पटना उच्च न्यायालय के तत्वावधान में सोमवार को संविधान दिवस मनाया गया. इस अवसर पर परिषद की ओर से बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में ‘प्रजातांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका’ विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश व चाणक्य विधि विश्वविद्यालय की कुलपति मृदुला मिश्र ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में विधायिका सीधे प्रजा के द्वारा निर्वाचित होती है. उसमें से बहुमत प्राप्त दल अथवा बड़े दलों का समूह सरकार का गठन करते हैं.
इससे पूर्व आरंभ में शाखाध्यक्ष कौशल कुमार सिंह ने स्वागत भाषण किया. परिषद के प्रदेश महामंत्री आमोद कुमार सिंह ने एक संक्षिप्त वृत्त प्रस्तुत किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र कुमार सिन्हा ने की. संचालन अधिवक्ता सीमा ने किया. कार्यक्रम में परिषद की सदस्य शिखा सिंह परमार, व्यवहार न्यायालय पटना के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिन्हा, महामंत्री नवीन कुमार, सिटी न्यायालय के संयोजक विनय कुमार, हाईकोर्ट शाखा के उपाध्यक्ष अशोक कुमार व नीरज समेत अनेक अधिवक्ता उपस्थित थे.
पटना : अनुसूचित जाति, जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय महासंघ द्वारा सोमवार को ज्ञान भवन में संविधान दिवस मनाया गया. इस आयोजन में केंद्र सरकार, राज्य सरकार के विभिन्न बोर्डों एवं निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के संगठनों के अधिकारियों एवं सदस्यों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शिवकृति सिंह ने कहा कि संविधान की रचना करनेवाले न केवल प्रखर बुद्धिजीवी थे, वरन राष्ट्र के सभी समुदायों और हिस्से का प्रतिनिधित्व करनेवाले सच्चे राष्ट्रभक्त थे. उन्होंने कहा कि न्यायालय का कार्य यह देखना होता है कि संविधान के प्रावधान और उसके तहत बनाये गये कानूनों का पालन होता है अथवा नहीं. हमारा संविधान एक तरह से जीवित प्राणी की तरह है. क्योंकि इसमें गति है और यह अपने पूर्व से आज तक विकास करता आया है.
संविधान की पहली लाइन ‘हम भारत के लोग’ ही हमारा वास्तविक प्रतिनिधित्व है. हमारा देश अद्भुत है, परंतु विविधता में एकता इसकी सर्वाधिक बड़ी खूबी है. उन्होंने याद दिलाया कि आजादी के बाद से ही भारत ने बहुत तेजी से आर्थिक प्रगति की है परंतु ग्रामीण इलाकों में आज भी बेरोजगारी व्याप्त है. यह एक बड़ी चुनौती है. कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने लोगों को संबोधित किया.
इस मौके पर बेजवाड़ा विल्सन, प्रो कांचा हलहया शेफर्ड, अरुंधति राय, प्रो जॉन के साथ देश के अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया. वहीं कार्यक्रम में मुंबई की टीम आईआरएस राजेश ढाबरे ने बाबा साहेब के गीतों की एक संगीतमयी प्रस्तुति दी. अतिथियों का स्वागत आईपीएस एडीजी पुलिस डॉ एके अंबेदकर ने किया. मौके पर संघ के अध्यक्ष डॉ मुंशी प्रसाद, नरेंद्र कुमार के साथ अन्य लोग मौजूद थे.

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