अनिकेत त्रिवेदी, पटना : राजधानी को महानगर बनाने का प्लान वर्षों से ख्वाब में ही चल रहा है. योजना की फाइलें सरकारी दराजों में धूल फांक रहीं हैं . महानगर बनाने के लिए बनी महानगर योजना समिति ने बीते चार वर्षों में सिर्फ एक अदद बैठक करने के सिवाय कुछ नहीं किया. वहीं समिति से पारित योजनाओं को जमीन पर अाने के लिए बनी मेट्रोपॉलिटन ऑथोरिटी ने सिर्फ दो सड़क का प्लान बनाने व उनकी मैपिंग करने के सिवाय कुछ भी जमीनी कार्रवाई नहीं की.
इसमें मनेर से लेकर बंका घाट तक दो प्रमुख सड़कों का निर्माण किया जाना है. पहली सड़क 80 मीटर चौड़ी फोर लेन सड़क, वहीं दूसरी 60 मीटर की टू लेन सड़क को बना कर तैयार करना था. मगर महानगर बनाने के लिए बनी महानगर योजना समिति द्वारा इन सब में अब तक कोई विशेष काम नहीं किया गया है. कुल मिला कर जब दो वर्षों में दो सड़क नहीं बन पायी, तो प्राधिकार शहर को महानगर कैसे बनायेगा, ये अपने आप में बड़ा सवाल है.
पटना मास्टर प्लान 2031 को अमल में लाने की मिली थी जिम्मेदारी
समिति सदस्यों को पटना मास्टर प्लान 2031 को अमल में लाने की जिम्मेदारी मिली थी. मास्टर प्लान में आनेवाले क्षेत्रों के रिसोर्स की मैपिंग कर उसका विकास करने का फैसला समिति के सदस्यों को करना था. नगर विकास मंत्री इस कमेटी के पदेन अध्यक्ष होते हैं. यह कमेटी अब नगरपालिका व पंचायतों के विकास की दिशा तय करेगी.
नगरपालिका अधिनियम में महानगर योजना समिति के कार्यों का निर्धारण किया गया है. इसमें समिति के गठन की तारीख से दो वर्षों के भीतर नगरपालिका व पंचायत के लिए भावी योजना तैयार की जायेगी. समिति महानगर क्षेत्र के लिए 20-25 वर्षों की योजना अवधि की नीति, रणनीति और प्राथमिकता का निर्धारण करने की जिम्मेदारी मिली है. समिति व्यापार व वाणिज्य और उद्योगों का विकास, ग्रामीण विकास, परिवहन व्यवस्था, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, संचार आदि पर काम करेगी.
1170 वर्ग किमी का होना था विकास
पायलट प्रोजेक्ट के तहत सौ एकड़ में 12 छोटे टाउनशिप मास्टर प्लान के तहत पांच सेटेलाइट टाउन बनाने की योजना थी. पूरे प्रोजेक्ट को तीन फेज में बांट का प्रेजेंटेशन किया जाना था. इसमें अल्ट्रा डेवलप टाउनशिप को विकसित किया जाना था. प्राधिकार ने इसके लिए बिहटा, दनियावां, खुशरुपुर, नौबतपुर व फतुहा का चयन किया था. कुल 1170 वर्ग किमी का विकास होना था. इसमें राजधानी के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के 195 पंचायतों को शामिल किया गया था.
