पटना : अब पटाखों के पैकेट पर जीएसटी की वजह से एमआरपी अंकित होकर आये हैं. पटाखा उत्पादकों को एमआरपी के मुताबिक जीएसटी देना पड़ रहा है.
वहीं पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी टैक्स भी कम हो गया है. इस तरह एक अनुमान के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में पटाखे की कीमतों में 20 से 30 फीसदी की कमी आयेगी. जीएसटी लागू होने से अब पटाखा दुकानदारों से एमआरपी पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लिया जायेगा.
इतना ही नहीं दुकानदारों को ग्राहकों को जीएसटी का बिल भी देना होगा. जानकारों की मानें, तो दुकानदार ग्राहकों को बिल नहीं दे सकते हैं, क्योंकि शहर में अधिकांश पटाखा विक्रेताओं के पास जीएसटी का निबंधन नहीं है. पहले 28 फीसदी से 35 फीसदी तक विभिन्न प्रकार के टैक्स लगते थे. इस साल केवल 18 फीसदी जीएसटी ही लगेगा. पटाखा के विक्रेता तनवीर अहमद ने बताया कि जीएसटी में कमी आने से इस बार पटाखों के दाम में कमी आयी है.
इससे कारोबारियों से लेकर ग्राहकों काे भी राहत मिलेगी. उन्होंने बताया कि इस बार पटाखा एमआरपी पर ही बिकेगा. पटाखा के थोक कारोबारी राजेश कुमार की मानें, तो इस बार जीएसटी में टैक्स की दर कम जरूर हुई, लेकिन कीमत में कुछ खास अंतर नहीं है. वैसे यह कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहा है. यह सीजनल कारोबार है.
घटेगी पटाखों की कीमत
इस वर्ष पटाखों पर जीएसटी की दरों को नवंबर, 2017 में घटा कर 18 फीसदी कर दिया गया था, जिससे इस बार पटाखे बीते वर्षों की तुलना में कुछ सस्ते हो सकते हैं. एक टैक्स लगने के कारण व वास्तविक एमआरपी से पटाखा सस्ता होगा ही. इससे पहले पटाखा पर 28 फीसदी तक टैक्स का प्रावधान था.
—राजेश कुमार खेतान, वरीय चार्टर्ड एकाउंटेंट
