पटना : दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के विकास व लोगों के सुविधा के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना शुरू की है. इससे न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इससे उनके पूरे परिवार का जीवनयापन भी होगा. योजना को लेकर युवाओं में उत्सुकता है. सरकार भी इसमें सहयोग कर रही है.
इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों को प्रखंड मुख्यालयों से जोड़ने में अतिरिक्त राशि की व्यवस्था कहीं परेशानी का सबब न बन जाये. लाभुक द्वारा सवारी वाहनों की खरीद में अतिरिक्त राशि जुटाने को लेकर योजना के सफल होने में संशय की संभावना है. सरकार के सहयोग के बाद भी वाहनों की खरीद में जो अतिरिक्त राशि लगेगी उसका जुगाड़ लाभुक कहां से करेंगे.
ऐसा तो नहीं कि योजना का लाभ लेने के लिए शुरुआती दौर में राशि का जुगाड़ कर लिया, बाद में वह उसके गले की हड्डी नहीं बन जाये. मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत एससी-एसटी व अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लोगों को मिलना है. योजना में चार सीट से लेकर दस सीट तक वाले वाहन खरीद का प्रावधान है. ऐसे में अधिक कीमत वाले वाहनों की खरीद में एक लाख अनुदान के अलावा अतिरिक्त राशि की व्यवस्था चुनौती होगी.
आवागमन की सुविधा व रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना शुरू
42 हजार वाहन खरीदे जायेंगे
ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रत्येक पंचायत में पांच-पांच वाहन खरीदे जायेंगे. इस तरह लगभग 42 हजार वाहनों की खरीद की जायेगी. योजना के तहत चार सीटों से लेकर 10 सीटों तक के नये सवारी वाहन लाभुक खरीद सकेंगे. वाहनों का परिचालन पंचायत से प्रखंड मुख्यालय तक होगा. सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को प्रखंड मुख्यालय तक लोगों को वाहन की सुविधा उपलब्ध कराना इस योजना का मुख्य मकसद है.
आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की सुविधा नहीं होने से लोगों को प्रखंड मुख्यालय पहुंचने में परेशानी होती है. सड़कें तो लगभग सभी गांवों में बन गयी हैं. लेकिन, उस हिसाब से परिवहन सुविधाएं नहीं हैं.
