पटना : सफाई पर रोज 38 लाख हो रहे ''साफ'' फिर भी गंदा है शहर

आयुक्त बदलें या मेयर, बजट बढ़ाने के बाद भी नहीं होता है जमीनी असर, सफाई के स्तर में नहीं हो रहा है सुधार अनिकेत त्रिवेदी पटना : शहर की सफाई का स्तर लगातार गिर रहा है. कभी स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर सफाई अभियान तो कभी डोर-टू-डोर कचरा उठाव करने के लिए अभियान चलाने के […]

आयुक्त बदलें या मेयर, बजट बढ़ाने के बाद भी नहीं होता है जमीनी असर, सफाई के स्तर में नहीं हो रहा है सुधार
अनिकेत त्रिवेदी
पटना : शहर की सफाई का स्तर लगातार गिर रहा है. कभी स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर सफाई अभियान तो कभी डोर-टू-डोर कचरा उठाव करने के लिए अभियान चलाने के बाद भी शहर के सफाई स्तर में कोई नियमित सुधार नहीं हो रहा है, लेेकिन अगर सफाई के नाम पर होने वाले खर्च का हिसाब लगाएं, तो लगभग 38 लाख रुपये से अधिक की राशि प्रतिदिन खर्च की जा रही है.
इसके अलावा नगर निगम बीते दो-तीन वर्षों में लगभग 40 करोड़ रुपये के संसाधन खरीद चुका है. वहीं इस वर्ष दो से तीन माह में नाला उड़ाही के नाम पर लगभग सात करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये हैं. मगर सफाई का स्तर है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है. बढ़ रहा है बजट पर असर नहीं दिख रहा है.
ऐसे समझिए पैसे का हिसाब
नगर निगम कचरा उठाव के लिए अपने संसाधन व भाड़े की गाड़ियों में ईंधन व किराये पर प्रतिमाह औसतन लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करता है. यानी प्रतिदिन 5 लाख रुपये का खर्च है. कर्मियों के वेतन व पेंशन पर लगभग दस करोड़ रुपये मासिक हो रहे हैं. 3000 के लगभग दैनिक व 1500 के लगभग नियमित सफाई मजदूर हैं. चूंकि नगर निगम का सबसे बुनियादी काम सफाई का ही है. इसलिए इस खर्च को भी सफाई से ही जोड़ा जाये तो प्रतिदिन का खर्च लगभग 33 लाख से ऊपर का हो जायेगा. यानी केवल दो खर्चों में भी प्रतिदिन का हिसाब 38 लाख रुपये का हो जा रहा है.
पुन: शुरू हो रहा है डोर-टू-डोर
इन खर्चों के अलावा सफाई पर नगर निगम ने और भी राशियां खर्च की हैं. पहले दो एजेंसियों को डोर-टू-डोर कचरा उठाव में लगाया गया था. इसके बाद एक बार फिर नगर निगम डोर-टू-डोर कचरा उठाव के लिए अपने स्तर से काम शुरू करने जा रहा है. इसमें अन्य संसाधनों की खरीद की जायेगी.
अब सौ करोड़ का बना है बजट
हालांकि नगर निगम सफाई को बेहतर बनाने का दावा कर रहा है. उप नगर आयुक्त विशाल आनंद ने बताया कि नगर निगम अगले एक से दो माह में काफी कुछ करने जा रहा है. लगभग 40 करोड़ रुपये के संसाधनों की खरीद का वर्क ऑर्डर दिया जा चुका है. अन्य 60 करोड़ रुपये की खरीद की जानी है. इसके अलावा दो अक्तूबर को डोर-टू-डोर कचरा उठाव की शुरुआत होगी. इसके अलावा रामाचक में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की शुरुआत होगी.
उड़ाही पर अलग से हुआ है खर्च
सफाई पर नियमित खर्च व नाला उड़ाही के अलावा नगर निगम ने तीन वर्षों में संसाधन बढ़ाने पर भी खर्च किया है. बीते दो वर्षों में जेसीबी, ऑटो टीपर, हाइवा, पोकलेन, डस्टबीन, डंपर से लेकर सक्शन मशीन व अन्य उपकरणों की खरीद पर 40 करोड़ से भी अधिक की राशि खर्च की है. इसके अलावा इस वर्ष लगभग सात करोड़ रुपये जलजमाव से बचाव के लिए नाला उड़ाही पर खर्च की गयी है. ये दोनों खर्च सफाई व वेतन के अलावा हैं.
सड़क पर कचरा
शहर से रोज 1000 टन कचरा निकलता है और निगम प्रतिमाह रामाचक बैरिया में 6000 टन कचरा देता है. इस हिसाब से प्रतिदिन केवल 200 टन कचरा रामाचक बैरिया मुख्य डंपिंग यार्ड में दिया जा रहा है. केवल निगम की ही मानें, तो 700 टन कचरा प्रतिदिन सड़क पर और सेकेंड्री डंपिंग यार्ड पर छोड़ दिया जाता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >