पटना : पीएमसीएच में हड़ताल से 23 की जान गयी, 68 घंटे बाद आखिरकार माने डॉक्टर, आज से लौटेंगे काम पर

पटना : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में करीब 68 घंटे से जारी हड़ताल बुधवार को खत्म हो गयी. गुरुवार यानी आज सुबह सात बजे से जूनियर डॉक्टर अपना कार्य संभाल लेंगे. ऐसे में अब मरीजों को राहत मिलेगी. हड़ताल को लेकर जूनियर डॉक्टरों एवं अस्पताल के अधीक्षक, प्रिंसिपल के बीच लगभग तीन घंटे तक […]

पटना : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में करीब 68 घंटे से जारी हड़ताल बुधवार को खत्म हो गयी. गुरुवार यानी आज सुबह सात बजे से जूनियर डॉक्टर अपना कार्य संभाल लेंगे. ऐसे में अब मरीजों को राहत मिलेगी. हड़ताल को लेकर जूनियर डॉक्टरों एवं अस्पताल के अधीक्षक, प्रिंसिपल के बीच लगभग तीन घंटे तक वार्ता हुई.
इसमें कई विभाग के विभागाध्यक्ष भी शामिल हुए. वार्ता में पीएमसीएच की सुरक्षा बढ़ाने, सभी वार्डों में अलार्म व सायरन सिस्टम लगाने एवं मारपीट में शामिल लोगों बाकी के लोगों को गिरफ्तार, सुरक्षा गार्डाें की संख्या में बढ़ोतरी करने सहित कई मांगों पर सहमति बनी. अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद व प्रिंसिपल डॉ अजीत वर्मा ने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जायेगी. उन्होंने जूनियर एक महीने का आश्वासन देते हुए कहा कि सुरक्षा सहित उनकी सभी मांगें एक माह के अंदर पूरी कर ली जायेगी.
साथ ही एनएमसीएच की तर्ज पर अलार्म व टोकन सिस्टम को सख्ती से लागू किया जायेगा. ताकि हंगामा व मारपीट आदि की घटना होते ही अलार्म बजने लगेगा और मौके पर सुरक्षा कर्मी जुट जायेंगे. बैठक में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ संकर भारतीय आदि कई डॉक्टर शामिल थे. वहीं जेडीए के पूर्व अध्यक्ष डॉ विनय कुमार यादव ने कहा कि 15 दिन बाद फिर जेडीए रिव्यू मीटिंग करेगा और हमारी मांग को कितना पूरा किया गया उस पर चर्चा की जायेगी.
हड़ताल से एनएमसीएच में बढ़ी भीड़:
पटना सिटी. नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पंजीयन काउंटर पर बुधवार को उपचार कराने आये मरीजों की भीड़ होने से अफरा-तफरी मची रही. दरअसल मामला यह है कि पीएमसीएच में कायम जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण यहां मरीजों की संख्या बढ़ बीते तीन दिनों से बढ़ गयी है. अस्पताल के केंद्रीय पंजीयन काउंटर पर लगातार तीसरे दिन भी शोरगुल व हंगामे की स्थिति रही. सुबह आठ बजे से पंजीयन काउंटर के शेड के बाहर तक कतार लगी थी.
सात मरीजों की मौत, सात ऑपरेशन टले, 300 मरीज अस्पताल छोड़ भागे
पटना : पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गयी है. पीएमसीएच में हड़ताल तीन दिन बीत चुके हैं. तीसरे दिन बुधवार को व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गयी. नतीजा इलाज के अभाव में सात मरीजों की मौत हो गयी और सात बड़े ऑपरेशन टाल दिये गये. अस्पताल के ओपीडी व इमरजेंसी में मरीजों की संख्या घट गयी है. दूसरी ओर शहर के निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के क्लिनिक में मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है. हड़ताल से कुल 23 लोगों की मौत हो गयी.
परिजनों में आक्रोश
हड़ताल के दौरान बुधवार की रात आठ बजे तक सात मरीजों की मौत हो चुकी थी. इसके अलावा सात बड़े ऑपरेशन टालने पड़ गये. तीन दिनों की हड़ताल में अब तक 23 मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं नाराज परिजनों में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला. परिजनों का कहना है कि हड़ताल की वजह जिन मरीजों की मौत हुई, उसमें उनका क्या कुसूर था. मौत और इलाज में उत्पन्न हाे रही बाधा की जवाबदेही तय होनी चाहिए. नाराज परिजनों का कहना है कि पूरी रात इलाज के अभाव में मरीज परेशान होते रहे.
100 मरीजों का इमरजेंसी से पलायन
हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहे मरीजों के सब्र का बांध तीसरे दिन टूट गया. इलाज नहीं मिलने की वजह से करीब 300 मरीज अस्पताल छोड़ दूसरे अस्पताल में चले गये. इमरजेंसी वार्ड खाली हो गया. वर्तमान में 40 प्रतिशत मरीज ही बेड पर भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है. सबसे अधिक इमरजेंसी वार्ड में 100 से अधिक मरीज पलायन कर गये. अधिकांश मरीज प्राइवेट अस्पताल की ओर रुख गये.
रात को कराह उठे मरीज
रात को सबसे अधिक परेशानी इमरजेंसी, स्त्री एवं प्रसूति रोग व राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक में भर्ती मरीजों हुई. क्योंकि इन वार्डों में एक सीनियर डॉक्टर के साथ तीन-चार जूनियर डॉक्टरों को लगाया जाता है. हड़ताल के कारण वार्ड सीनियर डॉक्टरों के सहारे रहे. इमरजेंसी ब्लॉक के दो वार्ड और एक सर्जिकल आईसीयू में डॉक्टरों की संख्या काफी कम थी.
आईसीयू, एचडीयू और जेनेटिक वार्ड भी सीनियर डॉक्टर के सहारे थे. मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक आदि वार्डों की भी यही स्थिति थी. इन्जेक्शन लगवाने, दवा देने और स्लाइन चढ़ाने जैसे कामों के लिए भी मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था.
इसलिए थे हड़ताल पर
खगौल के 12 साल के आदित्य राज को रविवार की रात सांप काट लिया था. मरीज प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाना चाह रहे थे, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया. इस पर नाराज आदित्य के परिजनों ने शिशु रोग विभाग के डॉक्टर दीनानाथ सिंह के साथ मारपीट की और अपने मरीज को प्राइवेट अस्पताल में लेकर चले गये. इसको लेकर डॉक्टर तीन दिन से हड़ताल पर हैं.
पटना : फुटेज पर मरीज के पिता का दावा, डॉक्टर ने भी उठाया था हाथ
पटना : पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टरों और मरीजों के बीच मारपीट का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक साल में तीन से चार बार हुई मारपीट की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था व प्रबंधन की पोल खोल दी है. आपसी विवाद के चलते जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से इलाज व्यवस्था पर काफी असर पड़ता है और मरीजों की मौत भी होती है. मारपीट के बाद जूनियर डॉक्टरों ने मरीज के परिजनों की गिरफ्तारी की मांग की और हड़ताल पर जा चुके हैं.
अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के खिलाफ पीरबहोर थाने में एफआईआर दर्ज करायी. डॉक्टरों की मांग पर 24 घंटे के अंदर पुलिस ने आदित्य के पिता अनिल को अरेस्ट कर लिया और जेल भेज दिया. लेकिन आदित्य के पिता का दावा है कि अगर सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाये, तो सब सच्चाई सामने आ जायेगी. अनिल की मानें तो जूनियर डॉक्टर दीनानाथ सिंह ने पहले मारपीट शुरू की थी.
जवाबदेही तय होनी चाहिए
पटना हाइकोर्ट के वरिष्ठ वकील सत्येंद्र कुमार का कहना है कि कोर्ट भी इमरजेंसी सेवा बाधित करने को नहीं कहता हैै. क्योंकि इमरजेंसी वार्ड में गंभीर मरीज जिंदगी और मौत से जूझते रहते हैं. आपसी विवाद के बाद बड़े स्तर पर हड़ताल और इस हड़ताल के बाद स्वास्थ्य सेवा के बाधित होने व मरीजों की मौत को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए.
क्या कहते हैं अधिकारी
जूनियर डॉक्टर के साथ काफी मारपीट हुई है. उसके चेहरे पर मारपीट के निशान हैं और वह पहले से ही कार्डियक का मरीज है. सीसीटीवी फुटेज की जांच हो रही है. जिसकी गलती सामने आयेगी, उसपर नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी.
– डॉ अजीत कुमार वर्मा, प्रिंसिपल, पीएमसीएच

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