वेटनरी कॉलेज में बनेगा जीनोम बैंक

पटना : विलुप्त हो रहे वन्य जीवों को बचाने के लिए पटना पशु विश्वविद्यालय (वेटनरी कॉलेज) आगे आया है. एक मुहिम के तौर पर वेटनरी कॉलेज अपने परिसर में जीनोम बैंक (स्पर्म बैंक) बनाने की तैयारी कर रहा है. इसमें विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे वन्य व गौ वंश प्रजातियों को संरक्षण देने व […]

पटना : विलुप्त हो रहे वन्य जीवों को बचाने के लिए पटना पशु विश्वविद्यालय (वेटनरी कॉलेज) आगे आया है. एक मुहिम के तौर पर वेटनरी कॉलेज अपने परिसर में जीनोम बैंक (स्पर्म बैंक) बनाने की तैयारी कर रहा है. इसमें विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे वन्य व गौ वंश प्रजातियों को संरक्षण देने व बचाने के लिए उनका स्पर्म प्रिजर्व किया जायेगा. इससे उनकी नस्ल बढ़ाने के साथ ही उनका इलाज व पारिस्थितिकी संतुलन भी कायम रखा जायेगा.

पटना वेटनरी कॉलेज ने एक मुहिम के तौर पर इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है.

इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है. बैंक स्थापित होने के बाद बिहार में भी दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित किया जा सकेगा. इसके लिए आईसीआर को प्रस्ताव बनाकर भेजा था, जहां आईसीआर ने सहमति प्रदान कर दी है. अब बीएलडीए से सहमति बाकी है.
-डॉ सरोज कुमार रजक, जनसंपर्क अधिकारी बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय
क्या है
जीनोम बैंक
मनुष्य और पशुओं के शरीर की कोशिकाओं में जीन के विशाल समूह को जीनोम कहते हैं. हर कोशिका में केंद्रक व गुणसूत्र होते हैं. जीनोम बैंक में पशुओं के लिये गये सैंपल को लिक्विड नाइट्रोजन के कंटेनर में रखा जाता है.
मंडरा रहा है खतरा
शाहाबाद जिले में पाये जाने वाला शाहाबादी भेड़, दियारा भैंस, पूर्णिया रोड गाय, सांभर हिरन, मोर, बारहसिंगा, बाघ, गौरैया, लेपर्ड, इंडियन बायसन, माउस डियर, मृग, पैंगोलिन, जंगली बैल और बंदर आदि ऐसे जीव हैं, जो विलुप्ति के कगार पर हैं.
आईसीआर ने दे दी है सहमति
पटना वेटनरी कॉलेज में जीनोम बैंक बने, इसके लिए कॉलेज प्रशासन द्वारा तैयार किये गये प्रोजेक्ट को इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीआर) को भेजा था, इसके बाद आईसीआर ने सहमति भी दे दी है. आईसीआर ने इसे बिहार लाइव स्टोक डेवलपमेंट एजेंसी (बीएलडीए) को भेज दिया है. बीएलडीए से सहमति मिलने के बाद कॉलेज परिसर में बैंक का निर्माण कार्य शुरू कराया जायेगा. कॉलेज प्रशासन की मानें, तो अगर वेटनरी कॉलेज में बैंक बनने की अनुशंसा पर मुहर लग गयी, तो बिहार के लिए यह पहला और देश का पांचवां बैंक होगा.
इस तरह से काम करता है जीनोम बैंक
बैंक बनाने में तीन से चार करोड़ रुपये खर्च होंगे. पहले जीनोम रिसोर्स बैंक को स्टेट फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की सहमति के लिए भेजा जायेगा. इसे छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च के लिए भी तैयार किये जाने की प्लानिंग है. बैंक में करीब चार लाख सैंपल रखे जा सकेंगे.

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