पटना : सरकारी अस्पतालों में ससमय डाॅक्टरों की उपस्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है. विभाग डाॅक्टरों की उपस्थिति को लेकर लगातार सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करवायेगा.
इस काम में जिलों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों का भी सहयोग लिया जायेगा. मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सदर अस्पतालों में डाॅक्टरों की अनुपस्थिति ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पिछले दिनों के औचक निरीक्षण में सौ के करीब डाॅक्टर अपनी ड्यूटी पर नहीं पाये गये थे.
पिछले कुछ वर्षों में सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है. इसका एक कारण तो अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार और दवाइयों की उपलब्धता है .
लेकिन, एक बड़ा कारण डाॅक्टरों की उपस्थिति थी. अस्पताल में डाॅक्टरों के रहने से मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी. 2006 में सरकारी अस्पतालों में औसतन एक महीने में 39 आते थे अब यह आंकड़ा 10 हजार को पार कर गया है.
सरकार इस पर वाहवाही भी लूट रही है. लेकिन, पिछले दिनों मुख्य सचिव के निर्देश पर जब अस्पतालों का औचक निरीक्षण हुआ तो उसका सच सामने आया. राज्य भर में कई अस्पतालों का निरीक्षण हुआ इसमें सौ के करीब डाॅक्टर नदारत पाये गये. मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक में डाॅक्टर गायब थे. डाॅक्टरों की समय पर उपस्थिति की नहीं है कोई ठोस व्यवस्था : अस्पतालों में डाॅक्टर समय पर पहुंचे इसकी निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. अस्पतालों में बायोमैट्रिक हाजरी की व्यवस्था की गयी, लेकिन अधिकांश मशीन खराब हैं. अस्पतालों का टेलीफोन का लैंडलाइन भी गड़बड़ है. हालांकि, दर्पण एप के जरिये काफी हद तक डाॅक्टरों की निगरानी शुरू हुई है.
औचक निरीक्षण में ड्यूटी पर नहीं मिले डाॅक्टर
पिछले दिनों विभिन्न सरकारी अस्पतालों का जिलाधिकारी और अनुमंडलाधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया. औचक निरीक्षण में 92 डाॅक्टर अपनी ड्यूटी से नदारत पाये गये थे. निरीक्षण में 60 से अधिक पारा मेडिकल स्टाफ भी अपनी.अपनी ड्यूटी पर नहीं थे.
निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक 25 डाॅक्टर भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में ड्यूटी पर नहीं पाये गये थे. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि सभी को समय पर अपने काम पर उपस्थित रहना होगा. औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेगा. निगरानी की व्यवस्था और दुरूस्त होगी.
