पटना : अर्थव्यवस्था को बड़ा हाेने के लिए पूंजीवादी व्यवस्था को बनाये रखने के साथ- साथ आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाया जाना आवश्यक है.
ये बातें ओसाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद्मश्री टोमियो मिजोकामी ने सोमवार को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा आर्थिक परिपेक्ष में जापान-भारत का संबंध विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि आर्थिक ताकत बनने के लिए यह आवश्यक है कि समाज के मध्यम वर्ग को भी आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जाये. तभी बाजार का विस्तार होगा.
मिजोकामी ने कहा कि विकास के लिए हमेशा अन्वेषण आवश्यक है. उन्होंने स्वीकार किया कि अन्वेषण और जोखिम उठाने में जापानी अब दूसरे विकसित देशों से पीछे हो रहे है जिसका नाकारात्मक प्रभाव उनके अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. उन्होंने बताया किजापान 1838 के बाद आर्थिक क्षेत्र में कैसे विकास किया. इस दौरानजापान को कई बड़े युद्ध का सामना करना पड़ा.मिजोकामी ने कहा कि विश्व युद्ध में हार जाने के बाद जापान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गया था. लेकिन काफी प्रयास के बाद संभल सका.
उन्होंने कहा कि कोरिया युद्ध के बाद शस्त्र सप्लाई से जापान का अर्थव्यवस्था मजबूत हुआ है. आरंभ में जापान में बाहरी लोगों को कारोबार करने पर रोक थी. मिजोकामी ने कहा कि आर्थिक ताकत बनने के लिए सरकार द्वारा कठोर आर्थिक फैसला एवं नीति का निर्माण किया जाना जरूरी है. लोकलुभावन आर्थिक निर्णयों से अर्थ व्यवस्था पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा बाधित होती है.इसके पूर्व बीआईए के अध्यक्ष केसीएस केसरी ने उनका स्वागत किया और पौधा देकर उन्हें सम्मानित किया. इस मौकेपर बियाडा के प्रबंध निदेशक आर एस श्रीवास्तव, बीआईए के महासचिव अरविंद सिंह, पूर्व अध्यक्ष राम लाल खेतान, अरुण अग्रवाल, उषा झा, किरन रंजन, संजय गोयनका, निशित जायसवाल,मनीष तिवारी आदि मौजूद थे.
