मृतक के परिजनों को अनुग्रह अनुदान के रूप में चार लाख रुपये दिये जाने का प्रावधान
पटना : राज्य के विशिष्ट प्रकृति की आपदा में नहरों में डूबने से होने वाली मौत को शामिल किया गया है. इसके तहत मृतक के परिजनों को अनुग्रह अनुदान देने का प्रावधान है.
इससे पहले नदियों, तालाबों और गड्ढों में डूबने से हुई मौत के मामले में सरकार सहायता राशि देती थी. इसका मकसद राज्य के नागरिकों को आपदा से होने वाली क्षतिपूर्ति करना और आपदा की विभीषिका से नागरिकों को बाहर निकालना है.
आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राज्य में नहर में डूबने से हुई मृत्यु के मामले में किसी भी तरह का अनुग्रह अनुदान देने का प्रावधान नहीं था, लेकिन राज्य के ग्रामीण इलाकों से ऐसी घटना की सूचना विभागीय स्तर पर प्राप्त होती रहती थी.
इसे देखते हुए आपदा की राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में नहर में डूबने से हुई मौत को भी आपदा की सूची में शामिल किया गया है.
आपदा में ये हैं शामिल : वज्रपात, लू, सामान्य से अधिक वर्षा, असमय भारी वर्षा, आंधी-तूफान, नाव दुर्घटना, नदियों, तालाबों, गड्ढों और नहरों में डूबने से हुई मृत्यु, सड़क दुर्घटना, वायुयान दुर्घटना, रेल दुर्घटना, गैस रिसाव से होने वाली मौत.
कैसे मिलता है अनुग्रह अनुदान
आपदा संबंधी सूची में शामिल किसी भी दुर्घटना के दौरान मौत होने पर उनके परिजनों को राज्य सरकार सामान्य रूप से चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देती है.
इसके लिए दुर्घटना के बाद मृतक का पोस्टमार्टम और घटना की एफआईआर आवश्यक है. साथ ही स्थानीय अंचल अधिकारी दुर्घटना संबंधी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज देते हैं. इस रिपोर्ट की जांच कर जिलाधिकारी अनुग्रह अनुदान की स्वीकृति के लिए आपदा प्रबंधन विभाग को भेज देते हैं. आपदा प्रबंधन विभाग अनुग्रह अनुदान की राशि संबंधित जिला को भेज देता है. उसके बाद यह राशि मृतक के परिजनों को मुहैया करा दी जाती है.
