बख्तियारपुर/मोकामा : अथमलगोला प्रखंड की रामनगर दियारा पंचायत के तीन वार्ड पांच-छह साल पहले गंगा में विलीन हो गये, लेकिन इन तीनों वार्डों में विकास की योजनाएं फाइलों में चल रही हैं. मिली जानकारी के मुताबिक इस पंचायत के सतरहबीघा टोला (वार्ड एक, दो और तीन) गंगा में लगातार कटाव के चलते पांच-छह साल पहले ही अस्तित्वविहीन हो गये.
यहां से ग्रामीण दूसरे स्थान पर पलायन कर गये. रामनगर पंचायत के राजन सिंह ने कहा कि वार्ड संख्या तीन में महज 10 से 12 मकान बचे हुए है, लेकिन यहां भी लोग नहीं रहते हैं. तीनों वार्डों के अधिकतर लोग पड़ोस की सबनीमा पंचायत में पांच साल से रह रहे हैं.
इसी पंचायत के वार्ड संख्या सात के विपिन सिंह, गोहन पासवान आदि ने आरोप लगाया कि विस्थापित लोगों के नाम पर करीब 100 शौचालय और 20 इंदिरा आवासों की राशि निकाल ली गयी. मामला सामने आने पर प्रखंड कार्यालय के सूचना पट्ट से लाभुकों की सूची हटा दी गयी. इसकी शिकायत पर स्थानीय अधिकारियों का रवैया टाल-मटोल वाला है. वार्ड संख्या 11 के निवासी मंटू सिंह की मानें तो सड़क व गली निर्माण और अन्य विकास कार्यों में घोर अनियमितता बरती गयी है.
अस्तित्वविहीन तीनों वार्डों में योजनाएं पारित कर दूसरे वार्डों में (पोषक क्षेत्र से बाहर) काम करा दिया गया. हाल ही में सात निश्चय से वार्ड संख्या तीन का स्थल दिखा कर वार्ड संख्या चार में गली का निर्माण करा दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता हीना देवी और अजय प्रसाद सिंह ने अधिकारियों से लिखित शिकायत कर जांच की मांग की है.
वार्ड संख्या एक दो और तीन में वर्तमान में करीब 100 लोग निवास कर रहे हैं. वार्ड संख्या तीन में सात निश्चय से पांच लाख की लागत से विकास का कार्य हुआ है. इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है. योजना का लाभ तीनों वार्डों में रहने वाले लोगों को ही मिला है.
राणा पंकज सिंह, मुखिया, रामनगर दियारा
विस्थापित लोगों को भी सरकारी योजनाओं के लाभ का हक है. हालांकि नियमानुकूल ही योजनाओं का लाभ मिलेगा. ग्रामीणों की शिकायत पर मामले की जांच करायी जा रही है. केवल वार्ड संख्या एक और दो अस्तित्वविहीन हैं. वार्ड संख्या तीन में लोग निवास कर रहे हैं.
मनीष भारद्वाज, बीडीओ, अथमलगोला प्रखंड
