पटना : बाढ़ की आड़ में दोगुना हुआ बालू का अवैध खनन

गंगा में पानी बढ़ते ही सक्रिय हुए बालू खनन माफिया, करोड़ों की हो रही अवैध कमाई घाट पर निगरानी के लिए लगाये गये पुलिसकर्मी सड़क पर कर रहे वसूली पटना : गंगा व सोन नदियों में पानी बढ़ने के साथ ही अवैध खनन दो गुना से अधिक बढ़ गया है. बाढ़ के पानी का सहारा […]

गंगा में पानी बढ़ते ही सक्रिय हुए बालू खनन माफिया, करोड़ों की हो रही अवैध कमाई
घाट पर निगरानी के लिए लगाये गये पुलिसकर्मी सड़क पर कर रहे वसूली
पटना : गंगा व सोन नदियों में पानी बढ़ने के साथ ही अवैध खनन दो गुना से अधिक बढ़ गया है. बाढ़ के पानी का सहारा लेकर गंगा व सोन में अवैध खनन का यह कारोबार संगठित रूप में चल रहा है. प्रशासन की सुस्ती के कारण सोन में हो रहे अवैध बालू के खनन को भी गंगा के रास्ते ही शहर में लाया जा रहा है.
पूरे दिन सोन के लाल बालू राजधानी के आसपास के घाटों पर उतारे जा रहे हैं जबकि सुबह शाम राजधानी के घाट पर अवैध बालू अनलोड कर दिये जाते हैं. कुल मिला कर पानी बढ़ने से प्रशासन सुस्त पड़ गया है, जबकि बालू खनन की रफ्तार कई गुना बढ़ गयी है और माफियाओं द्वारा अवैध खनन में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई जा रही है.
बिल्कुल पानी में डूबी लगती है नाव
ऐसा नहीं की नदी में बालू खनन करना आसान है. लोग जान की बाजी लगा बाल्टी के सहारे नदी से बालू निकाल कर नाव में लोड करते हैं.
बाढ़ के समय यह और खतरनाक हो जाता है. जब कोई नाव पूर्ण रूप से बालू से भर जाती है तो वो पानी में महज पांच से छह इंच की ऊपर दिखती है. बाढ़ के समय यह अधिक खतरे वाला काम हो जाता है. एक नाव में लगभग तीन ट्रक यानी 18 ट्रॉली बालू लोड किया जाता है. इस समय एक ट्रैक्टर बालू की कीमत छह हजार तक है.
राजधानी के घाटों से निकाला जा रहा सफेद बालू
सरकार ने बरसात के समय तीन माह के लिए सोन में बालू के खनन पर रोक लगा दी है. अब सितंबर तक निबंधित ठेकेदार भी बालू का खनन नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा गंगा के सफेद बालू पर पहले से ही प्रतिबंध लगा है.
इसके बावजूद सोन में तो अवैध खनन किया ही जा रहा है. वहीं अब राजधानी के घाटों पर भी सफेद गंगा बालू निकालने का काम चालू है. रविवार को कई घाटों से अवैध बालू निकाला जा रहा था. कृष्णा घाट पर किनारे में नाव लगाकर लोग खनन कर रहे थे.
बंद नहीं हुआ ओवरलोड नावों का परिचालन
अवैध बालू खनन के अलावा गंगा में इस पार से उस पार आने जाने वाले लोगों की ओवरलोड नाव भी चल रही है. कई घाटोंपर गंगा का पानी आ चुका है. इसका फायदा उठाकर कई घाटोंसे दियारा में जाने के लिए नावें चलायी जा रही हैं. दीघा और पाटीपुर के अलावा समाहरणालय, महेंद्रू, काली घाट, कृष्णा घाट से भी नाव दियारा में जा रहे हैं. पानी बढ़ने के बाद भी प्रशासनकी ओर से नाव परिचालन को लेकर कोई निगरानी नहीं कीजा रही है.
इधर निगरानी में आ रही कठिनाई
प्रशासन को गंगा में पानी की तेज रफ्तार के कारण निगरानी करने में भले ही कठिनाई आ रही है, लेकिन अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद है.
खनन विभाग की सहायक निदेशक वंदना कुमारी ने बताया कि पानी का करेंट (रफ्तार) अधिक है. इसलिए अवैध नावों का पीछा करना थोड़ा मुश्किल भरा होता है. फिर भी कार्रवाई की जा ही है. तीन अगस्त को एक नाव को जब्त किया गया था. इसमें एक हजार घन फुट बालू भी था. प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
गंगा में निगरानी लगभग बंद खनन माफिया का कारोबार चालू
पानी बढ़ने के बाद गंगा पुलिस ने गंगा में निगरानी लगभग बंद कर दी है. इसका फायदा अवैध खनन करने वालों को मिल रहा है. अवैध खनन में लगे एक खनन कर्मी ने बताया कि पहले नाव के सहारे सोन से गंगा नदी में पटना तक आने में लगभग आठ घंटे का समय लगता था, जबकि अब पानी की रफ्तार बढ़ने से आधा समय लग रहा है. अब नाव तेज चलती है जिसका फायदा मिल रहा है. खनन तेजी हो रहा है. इससे कमाई दोगुनी हो गयी है.
सबसे बड़ी बात है कि अवैध खनन करने वाले लोगों का हौसला इतना बढ़ गया है कि दिन में ही कई जगहों पर खनन चालू है. अगर कोई जेपी सेतु पर आधा घंटा हो जाये तो इस दौरान लगभग 100 बालू भरे नाव गंगा से गुजरते हुए दिख जायेंगे, लेकिन प्रशासन की इस ओर नजर नहीं जा रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >