पटना : बाल विवाह निरोधक कानून के आपत्तिजनक प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जबाब तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कौशलेंद्र नारायण की रिट याचिका को सुनते हुए केंद्र व राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दायर करने का निर्देश दिया है.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया की बाल विवाह निरोधक कानून जो, नवंबर 2007 से लागू हुआ वह संसद से पारित अधिनियम है.
इसके धारा 5 में एक प्रावधान है कि बाल विवाह दंपति से जन्मे बच्चे को उचित पालन पोषण हेतु अलग शिशु केंद्र में जिला जज के आदेश पर रखा जायेगा. यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधि व अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. क्योंकि दुधमुहे बच्चे को उसके जीवित मां से अलग नहीं किया जा सकता. वहीं दूसरी ओर यह प्रावधान हिन्दू गार्जियनशिप एवं मेंटेनेंस एक्ट और जुवेनाइल कानून का भी विरोधाभासी है. हाईकोर्ट ने कानून की संवैधानिकता पर उठे सवाल पर संज्ञान लेते हुए केंद्र व राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है.
