पटना : जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार अग्रिम इनपुट अनुदान का दायरा बढ़ायेगी. इस पर विचार किया जा रहा है. वहीं, जैविक कोरिडोर में शामिल नौ जिलों के लिए इस साल सितंबर तक नयी योजना लायी जायेगी. अगले वित्तीय वर्ष से अन्य फसलों पर भी यह योजना लागू की जायेगी. अब तक इसका फायदा केवल जैविक सब्जी खेती करने वालों को ही मिलता था. यह जानकारी कृषि मंत्री प्रेम कुमार और प्रधान सचिव सुधीर कुमार ने दी. वे गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि जैविक सब्जी खेती के लिए अग्रिम इनपुट अनुदान योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राज्य सरकार ने नालंदा, पटना, वैशाली और समस्तीपुर जिलों में संचालित किया. इन चारों जिलों में प्रति 0.3 एकड़ या 1250 वर्गमीटर के लिए 6000 रुपये प्रति कृषक का अग्रिम इनपुट अनुदान दिया जाना था. अब तक 17666 किसानों के खाते में 10,43,42,577 रुपये ई-कैश के रूप में दिये जा चुके हैं.
इस महत्वाकांक्षी योजना को संचालित करने में बिहार देश का पहला राज्य बन गया है. इसकी सराहना नीति आयोग ने भी की और इसे देश के अन्य राज्यों में संचालित करने के लिए विचार-विमर्श किया जा रहा है.
किसानों का होगा केवल एक ही बार पंजीकरण : मंत्री ने कहा कि किसानों का पंजीकरण केवल एक ही बार कृषि विभाग में होगा. वे इस आधार पर कृषि और सहकारिता विभाग में अलग-अलग आवेदन देकर सभी योजनाओं लाभ उठा सकेंगे. जिनका पहले से कृषि विभाग से पंजीकरण है उन्हें फिर से पंजीकरण करवाने की जरूरत नहीं है.
इससे इस बात की जानकारी मिल सकेगी कि एक किसान कितनी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. राज्य में 6,62,417 किसानों ने अपना ऑनलाइन पंजीकरण करवाया हैै. 1,38,042 किसानों ने डीजल अनुदान के लिए आवेदन दिया है. इसमें से 9729 किसानों को 85,25,000 रुपये अनुदान वितरित किये गये हैं.
मक्का व पान किसानों को मुआवजा देने पर फंसा पेच
इस साल मक्का और पान के किसानों को फसल की क्षति का मुआवजा मिलने पर पेच फंस गया है. कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार ने कहा कि राज्य में करीब 1,67,645 मक्का किसानों की फसल की क्षति हुई थी. इसके लिए 122 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देने के लिए आपदा विभाग को संस्तुति की गयी थी. वहीं राज्य के 15 जिलों में 6878 किसानों की पान की खेती की क्षति हुई थी.
इसकी क्षतिपूर्ति के लिए भी विभाग ने आपदा विभाग को संस्तुति भेजी थी. इन दोनों फसलों की क्षति का आधार वैज्ञानिकों द्वारा जलवायु परिवर्तन को बताया गया था, लेकिन आपदा विभाग ने इसे नकार दिया है. कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि आपदा विभाग के साथ बैठक कर जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जायेगा.
