राजधानी के पांच लाख लोगों की जिंदगी को बनाया जा रहा कष्टप्रद
पटना : राजधानी की पांच लाख की आबादी हर साल जलजमाव की विभीषिका झेलती है. जलजमाव के चलते भयंकर दुर्गंध और अस्त-व्यस्त सुविधाओं के बीच उनकी जिंदगी बेहद कठिन हो जाती है. गजब की बात यह है कि हर साल इसे रोकने के लिए काम किया जाता है.
इस दौरान ये काम इतने घटिया दर्जे के होते हैं, कि वे हर बार बारिश में बह जाते हैं. इस संदर्भ में हैरत में डालने वाली बात यह है कि जलजमाव की समस्या से स्थायी तौर पर निजात दिलाने के लिए न तो योजनाकारों ने कुछ किया और न वहां के जनप्रतिनिधियों ने ठोस कदम उठाये. कुल मिला कर इस इलाके में जलजमाव पैसा कमाने की सलााना रस्म में तब्दील हो चुकी है.
करीब 10 करोड़ खर्च करने के बाद भी राहत नहीं : वार्ड संख्या-38 के कांग्रेस मैदान, दलदली और राजेंद्र पथ में वर्षों से जलजमाव की समस्या बन रही है.
इस समस्या को दूर करने के लिए नगर आवास विकास विभाग द्वारा करीब 10 करोड़ की लागत से तीनों जगहों पर बॉक्स नाले बनाये गये, लेकिन नाला निर्माण में फॉल्ट होने की वजह से पानी निकासी नहीं हो रही है. इसके साथ ही पार्षद की अनुशंसा पर भी दो करोड़ से अधिक राशि नाला निर्माण पर खर्च की गयी. इसके बावजूद कांग्रेस मैदान, दलदली और लोहानीपुर इलाके में जलजमाव की समस्या बनी हुई है. ये लोग पिछले चार दिनों से परेशान हैं.
संप हाउस के निर्माण में फॉल्ट, नहीं हो रही समुचित पानी की निकासी : कंकड़बाग अंचल क्षेत्र के अशोक नगर, चांगर, आरएमएस कॉलोनी, संजय गांधी नगर, आजाद नगर, करबिगहिया, पूर्वी इंदिरा नगर, चांदमारी आदि इलाकों में जलजमाव की भयावह स्थिति रहती है.
जलजमाव की समस्या से स्थायी निदान को लेकर साढ़े सात करोड़ की लागत से अशोक नगर जीरो प्वाइंट पर दो वर्षों से संप हाउस बनाया जा रहा है, जो निर्माणाधीन है और निर्माण में फॉल्ट है. अशोक नगर व करबिगहिया से आने वाले आउटलेट नीचे और संप हाउस का आउटलेट एक मीटर ऊंचा है. वहीं, पानी के सामान्य बहाव को लेकर बनाया गया नाला भी 12 इंच ऊंचा है. इससे संप हाउस के माध्यम से समुचित पानी का बहाव नहीं हो रहा है. आलम यह है कि बुधवार को भी कंकड़बाग इलाके में जलजमाव की भयावह स्थिति बनी हुई है.
पार्षदों की अनुशंसा पर नहीं हुई कार्रवाई
वार्ड संख्या-17, 31, 32, 38, 44, 29 सहित कई वार्ड पार्षद हैं, जिन्होंने नाला निर्माण व नाला कनेक्शन से संबंधित अनुशंसा
की.
लेकिन, निगम प्रशासन ने समय रहते पार्षदों की अनुशंसा पर योजना बना कर उसका क्रियान्वयन नहीं किया. स्थिति यह है कि नाला बना है और कनेक्शन नहीं है.वहीं,नाला निर्माण भी आधा-अधूरा है. इससे जलजमाव की समस्या वर्षों से बनी हुईहै.
पाजामा ऊपर कर जलजमाव में कूदे तेजस्वी ने सरकार को खूब कोसा
पटना. बरसात के दौरान जल जमाव व अन्य समस्याओं को लेकर नेता विरोधी दल तेजस्वी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री और मेयर पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि पटना में मेयर भाजपा का है. नीतीश कुमार 14 साल से मुख्यमंत्री हैं. इतने सालों के बाद भी वह राजधानी को जल जमाव की समस्या से मुक्त नहीं करा सके हैं. पूरी सरकार और प्रशासन अभी तक आईसीयू है. तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ रामचंद्र पूर्वे के साथ पटना शहर के जलजमाव वाले इलाकों का जायजा लिया.
निगम मुख्यालय पर महानगर राजद का प्रदर्शन
पटना. राजधानी में बारिश होने के बाद दर्जनों इलाकों में जलजमाव की समस्या बन गयी और बारिश खत्म होने के तीसरे दिन भी समस्या बनी हुई है. इस समस्या को लेकर बुधवार को महानगर राजद ने निगम मुख्यालय में प्रदर्शन किया. महानगर अध्यक्ष महताब आलम व वार्ड पार्षद आशीष कुमार सिन्हा के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता मुख्यालय पहुंचे और नगर आवास विकास विभाग मंत्री, प्रधान सचिव व नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी किया.
पटना के ज्वाइन डायरेक्टर एग्रोनाेमी उमेश प्रसाद मंडल ने बताया कि अभी भी काफी बोवनी बाकी है. इसके लिए काफी प्रयास किये जा रहे हैं. मंडल के मुताबिक धान की रोपनी केवल 31 फीसदी हुई है. उम्मीद है कि अभी अच्छी बारिश हो सकेगी. अरहर,उड़द कार रकबा भी लगातार बढ़ रहा है,क्योंकि ये सभी फसलें कम पानी में अच्छी तरह हो सकती हैं. जानकारों के मुताबिक अब 50 फीसदी से अधिक बोवनी संभव नहीं दिख रही,क्योंकि अगर बोवनी लगातार जारी रखी गयी तो रबी की फसल प्रभावित हो सकती है.
पटना जिले में खरीफ की बोवनी के हालात चिंताजनक हैं. अभी तक केवल 35 फीसदी बोवनी हो सकी है. सबसेकम रोपनी धान की हुई है. इस साल धान के लिए तय रकबे में केवल 31 फीसदी ही रोपनी हो सकी है. जानकारों के मुताबिक धान की रोपनी के लिए अब बहुत कम बचा है. हालांकि सबसे ज्यादा बोवनी मक्का की हुई है.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक धान की रोपानी के लिए इस साल खरीफ सीजन में एक लाख पन्द्रह हजार हेक्टेयर का रकबा तय किया गया था. इसकी तुलना में केवल 36 हजार हेक्टेयर में रोपनी हो सकी है. जानकारी के मुताबिक धान की रोपनी के लक्ष्य को पानी मुश्किल दिख रहा है,क्योंकि अब इसके लिए समय बेहद कम बचा है. हालांकि धान की कम अवधि वाली किस्म की रोपनी अभी करीब हफ्ते भर संभव है. हालांकि अभी इतनी बरसात नहीं हुई है कि किसान जोखिम ले सके.
