खाने में सड़ी सब्जी और पानी जैसी दाल, सुरक्षा एेसी कि रात में आ जाते हैं अजनबी

पटना : पटना में महिला छात्रावासों का हाल बुरा है. छोटे-छोटे कमरे और रहने की खराब व्यवस्था तो आम बात है, लेकिन सोने और खाने की व्यवस्था कुछ ज्यादा ही गड़बड़ है. हालत ऐसे हैं कि यहां कई हॉस्टल के कमरों में एक साथ चार-चार बिस्तरों को जोड़ दिया गया है. कमरों के एक कोने […]

पटना : पटना में महिला छात्रावासों का हाल बुरा है. छोटे-छोटे कमरे और रहने की खराब व्यवस्था तो आम बात है, लेकिन सोने और खाने की व्यवस्था कुछ ज्यादा ही गड़बड़ है. हालत ऐसे हैं कि यहां कई हॉस्टल के कमरों में एक साथ चार-चार बिस्तरों को जोड़ दिया गया है. कमरों के एक कोने में अपना गैस चूल्हा रख सकते हैं, ताकि आप कुछ बना कर खा लें.

इसमें जगह की काफी कमी है. सामान रखने में परेशानी होती है. खाने का हाल तो और भी बुरा है. कहीं खराब सब्जी तो कहीं पतली दाल मिलने की शिकायत आम है. कभी-कभी तो हॉस्टल के भीतर अजनबी तक घुस जाते हैं, जिससे डर लगने लगता है. पटना वीमेंस कॉलेज बॉउंड्री के पीछे कई हॉस्टलों में प्रभात खबर की टीम ने निरीक्षण किया.

सस्ते में मिले सब्जी, इस कारण देर रात होती है खरीदारी
विभिन्न हॉस्टल में रहने वाली कई छात्राओं ने कई अहम बातें बतायीं. छात्राओं ने कहा कि सब्जी मंडी से देर रात सस्ते में ढेर सारी सड़ी-गली सब्जियों की खरीदारी होती है. हॉस्टल से रात 10 बजे सब्जी खरीदने के लिए स्टाफ जाते हैं. सब्जी वाले भी हॉस्टल वालों का इंतजार करते हैं. वैसे भी रात 10 बजे के बाद सब्जियों के भाव में कमी हो जाती है. थोक भाव से सस्ते में सब्जियां लायी जाती हैं. इसमें सड़ी-गली सब्जियां भी शामिल होती हैं जिसे हॉस्टलों में खपाया जाता है. खाना बनाते समय सही से सब्जियों को धोया भी नहीं जाता है. जल्दबाजी में किसी तरह सब्जियां बना दी जाती हैं. दाल भी काफी पतली बनायी जाती है.
कुर्सी और टेबल की जगह नहीं : हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं शिकायत करती हुए कहती हैं कि हॉस्टल में किसी भी प्रकार की सुविधाएं नहीं दी जाती हैं, जबकि यहां आने से पहले तरह-तरह के वादे किये जाते हैं. हॉस्टल में डेढ़ साल से रह रही अनामिका (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उन्हें ठीक तरीके से खाना भी नहीं मिलता. हॉस्टल के एक छोटे से कमरे में तीन से चार बेड लगाये गये जाते हैं. कुर्सी और टेबल लगाने की जगह तक नहीं है. लड़कियों का आरोप है कि हॉस्टल वाले पैसे तो खूब लेते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं देते हैं.
लड़कियों की हिफाजत के लिए कोई व्यापक तैयारी नहीं : पटना वीमेंस और जेडी वीमेंस कॉलेज के पीछे मौजूद अधिकांश घरों में हॉस्टल चल रहे हैं. यह पॉश इलाका भी है. अच्छे-अच्छे मकान और अपार्टमेंट भी बने हुए हैं. अधिकांश आवासीय घरों में यहां हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, लेकिन ज्यादातर हॉस्टल दरबा की तरह हैं.
हॉस्टल में छोटे-छोटे प्लाई के बने कमरे मिल जायेंगे. गंदे बाथरूम व टॉयलेट, संकरी सीढियां तो कई हॉस्टलों की पहचान बन गयी हैं. यहां रहने वाली छात्राएं कहती हैं कि घटिया चावल और उस के साथ पानी जैसा दाल परोसा जाता है. मौसमी सब्जियां खाने को नहीं मिल पाती हैं. हॉस्टल में लड़कियों की हिफाजत के लिए कोई व्यापक तैयारी किसी के पास नहीं है. साफ-सफाई पर भी ध्यान नहीं रहता है. किराया और सुविधा के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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