पटना : राज्य में सूखे की संभावना को देखते हुए ग्रामीण विकास विभाग ने भी अपने स्तर से तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए मनरेगा के तहत मजदूरों को समुचित रोजगार मुहैया कराने के अलावा वैसे कार्यों या योजनाओं को संपन्न कराने में ज्यादा तरजीह देने को कहा गया है, जो जल इकाईयों मसलन तलाबों के जीर्णोद्धार, सूक्ष्म एवं लघु सिंचाई से संबंधित कार्यों के अलावा ऐसे ही अन्य कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संपन्न कराने के लिए कहा गया है. इसमें उचित स्थान का चयन करके पौधरोपण या वाणिकी के कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए कहा गया है.
ताकि पर्यावरण के संतुलन को बनाते हुए मॉनसून को सामान्य करने में मदद मिल सके. इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संपन्न कराने के लिए कहा गया है. सभी जिलों में पहले से लंबित पड़ी जल संरक्षण या प्रबंधन से संबंधित योजनाओं को समय पर संपन्न कराने के लिए खासतौर से ध्यान देने की बात कही गयी है.
सभी पंचायतों में मनरेगा के तहत जल संरक्षण की योजना को प्राथमिकता के तौर पर पूरा किया जाये और नये कार्य शुरू किये जाये, जिससे सुखाड़ की स्थिति होने पर भी गरीबों को रोजगार मिलता रहे. इस मामले में विभाग सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सभी जिलों के डीएम, डीडीसी और जिला रोजगार पदाधिकारी को पत्र लिखा है.
सभी अधिकारियों को कहा गया है कि जल संरक्षण के कार्यों की तैयारी और रोजगार उपलब्धता की नियमित समीक्षा भी की जाये. विशेष सतर्कता अपनाते हुए मिट्टी के कार्य 15 जून से 15 अक्टूबर के बीच कराये जायें.
ये है उद्देश्य
सूखा के दौरान इन कार्यों को कराने का मुख्य मकसद गरीबों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के अलावा मजदूरों को इस समय भी समुचित रोजगार मुहैया कराना है. बेरोजगारी की समस्या पैदा होने से उनके पलायन की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसलिए ग्रामीण आबादी को पलायन से रोकने के लिए इस तरह की पहल की जा रही है. सभी जिलों के डीएम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके जिले के सभी इच्छुक ग्रामीण परिवारों को मनरेगा के अंतर्गत मांग के अनुरूप तत्परता से रोजगार दिया जा रहा है.
