पटना : विभिन्न मामलों में विचाराधीन अथवा सजा पा चुके कैदियों को शिक्षित करने की सरकार की पहल परवान चढ़ने जा रही है. शिक्षा के प्रति रुचि दिखाने वाले कैदियों पर कारा प्रशासन की कृपा रहेगी. उनको न केवल अच्छा माहौल उपलब्ध कराने की कोशिश होगी, बल्कि कॉपी-किताब भी उपलब्ध करायी जायेगी. सभी काराओं में खाेले गये स्टडी सेंटरों में इग्नू की ओर से संचालित होनेवाले कोर्स के लिए इसी माह नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी. जेल में बंद महिला-पुरुष कैदियों को सकारात्मक नजरिया मिले.
शिक्षित बनकर वह आम धारा में लौट सकें, इसके लिए सरकार ने प्रत्येक कारा में एक अध्ययन केंद्र की स्थापना की है. बिहार में 58 कारागार हैं. सभी कारागार के अध्ययन केंद्रों में कैदी अपना नामांकन करा रहे हैं. 31 जुलाई तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी. उप महानिरीक्षक (कारा) नीरज कुमार झा ने बताया कि सभी 58 स्टडी सेंटरों में अंडर ग्रेजुएट, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और प्रोफेशनल कोर्सों की पढ़ाई होगी. यहां बाहर से ट्यूटर आयेंगे. नामांकन करानेवाले कैदियों- बंदियों को कागज कलम का खर्च कारा प्रशासन ही उठायेगा. जेल के अंदर शिक्षा का माहौल बनाया जा रहा है.
भागलपुर जेल में हो चुका है प्रयोग : जेल काे स्कूल बनाने का प्रयोग इससे पहले वर्ष 14-15 में भागलपुर जेल में हुआ था. उप महानिरीक्षक (कारा) नीरज कुमार झा ने बताया कि उन्होंने 1382 कैदियों को शिक्षित किया गया था. इसके लिए दो बार परीक्षा करायी गयी थी. नीरज कुमार का मानना है कि स्टडी सेंटर सरकार की सार्थक पहल है. इससे कैदियों की स्थिति सुधरेगी.
