पटना : एक ही पोर्टल पर मिलेंगी आरटीपीएस की तमाम ऑनलाइन सेवाएं, जानें

पटना : लोक सेवा का अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के तहत ऑनलाइन दी जाने वाली सेवाओं की संख्या कम से कम छह गुनी बढ़ायी जायेगी. वर्तमान में आरटीपीएस के तहत 50 से 55 सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से दी जा रही हैं, जिसे बढ़ा कर 300-325 करने का लक्ष्य रखा गया है. इतना ही नहीं, अलग-अलग विभागों […]

पटना : लोक सेवा का अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के तहत ऑनलाइन दी जाने वाली सेवाओं की संख्या कम से कम छह गुनी बढ़ायी जायेगी. वर्तमान में आरटीपीएस के तहत 50 से 55 सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से दी जा रही हैं, जिसे बढ़ा कर 300-325 करने का लक्ष्य रखा गया है.
इतना ही नहीं, अलग-अलग विभागों द्वारा दी जाने वाली ऑनलाइन सेवाओं को एक ही छत के नीचे भी लाया जायेगा. मसलन अलग-अलग सेवाओं के लिए आवेदकों को अलग-अलग पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं होगी. उनको आरटीपीएस के पोर्टल पर ही तमाम
ऑनलाइन सेवाओं के लिए लिंक उपलब्ध कराये जायेंगे. मुख्य सचिव दीपक कुमार की पहल पर सूचना प्रावैधिकी विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है.
मुख्य सचिव के स्तर पर बैठक
सेवाएं ऑनलाइन किये
जाने को लेकर मुख्य सचिव के स्तर पर इसी माह बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में सभी विभाग अभी ऑफलाइन चल रही सेवाओं को ऑनलाइन मुहैया कराने को लेकर किये जा रहे प्रयासों के संबंध में जानकारी देंगे. इसके आधार पर ही आगे की रूपरेखा तय की जायेगी.
सभी विभागों को लिखी गयी चिट्ठी
इसको लेकर सूचना प्रावैधिकी विभाग ने सभी विभागों को चिट्ठी लिखी है. विभाग ने करीब 700 ऐसी सेवाओं को चिह्नित किया है, जिसे आवेदकों को मैनुअली उपलब्ध कराया जाता है.
खास कर वैसी सेवाएं, जो दूसरे राज्यों में ऑनलाइन पर बिहार में ऑफलाइन दी जाती है, का हवाला देते हुए सूचना प्रावैधिकी विभाग ने सभी विभागों से पूछा है कि क्या आपकी इन सेवाओं को ऑनलाइन किया जा सकता है? अगर 700 में 300 सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध हो पाती हैं तो यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि होगी. उदाहरण के तौर पर कृषि विभाग द्वारा दी जाने वाली लोन व सब्सिडी सेवाएं कई राज्यों में ऑनलाइन ही मिलती है, लेकिन बिहार में यह सेवा ऑफलाइन है.
आरटीपीएस के तहत दी जाने वाली तमाम सेवाएं जल्द ही एक पोर्टल पर उपलब्ध होंगी. इसके साथ ही ऑनलाइन मुहैया करायी जाने वाली सेवाओं की संख्या भी बढ़ायी जायेगी. इसको लेकर मुख्य सचिव का अनुमोदन प्राप्त कर सभी विभागों को चिट्ठी लिखी गयी है.
-विशाल आनंद, विशेष कार्य पदाधिकारी, सूचना प्रावैधिकी विभाग

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