पटना : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय सभी राज्यों में स्टेट काउंसिल की मदद से स्टूडेंट प्रोजेक्ट स्कीम चला रहा है. इस स्कीम के तहत डिग्री या डिप्लोमा कर रहे इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के छात्रों को आर्थिक मदद उपलब्ध करायी जाती है.
स्कीम खास कर उन छात्रों के प्रोत्साहन को लेकर है, जो नियमित पाठ्यक्रम के दौरान छोटी मगर बेहद उपयोगी शोध परियोजनाओं पर काम करते हैं. विभाग की बिहार काउंसिल को 60 लाख उपलब्ध कराये गये हैं. काउंसिल ऐसे चयनित प्रत्येक छात्र को प्रति प्रोजेक्ट प्रति वर्ष आठ हजार रुपये का अनुदान देगा.
हर साल लगेगी चयनित प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी
चयनित किये जाने वाले प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी, सेमिनार सह प्रदर्शनी के तौर पर भी लगायी जायेगी. इस प्रदर्शनी में छात्रों को प्रोजेक्ट इवैल्युेशन कमेटी के समक्ष अपने प्रोजेक्ट की डिटेल जानकारी देनी होगी. अधिकारियों के मुताबिक प्रोजेक्ट टाइटल या उसके उद्देश्यों में थोड़ा भी बदलाव इसके रद्द किये जाने का कारण बन सकता है.
हर मंजूर किये गये प्रोजेक्ट को एक रेफरेंस नंबर दिया जायेगा, जिसे वे लोग सरकारी पत्र व्यवहार में इस्तेमाल करेंगे. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद छात्रों को अनिवार्य रूप से प्रोजेक्ट टाइटल के साथ उसका सारांश लिख कर जमा कराना होगा. इसमें प्रोजेक्ट के परिचय व बैकग्राउंड के साथ ही इसके क्रियाविधि, परिणाम व निष्कर्ष तथा काम के भविष्य के स्कोप के बारे में संक्षिप्त जानकारी रहेगी.
इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक के छात्रों को फायदा
इस स्कीम का फायदा इंजीनियरिंग कॉलेजों व पॉलिटेक्निक संस्थानों के छात्रों को मिलेगा. कॉलेजों के माध्यम से काउंसिल को प्राप्त होने वाले प्रोजेक्ट की गठित कमेटी द्वारा स्क्रूटनी की जायेगी. इसके बाद इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार को भेज दिया जायेगा.
भारत सरकार की मंजूरी के बाद चयनित छात्रों को कॉलेजों के माध्यम से अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा. योजना का मुख्य उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को हल करने में छात्रों की प्रतिभा को विकसित करना है.
