पटना : मुजफ्फरपुर सहित अन्य कई जगहों पर बालिका गृहों में नाबालिग लड़कियों के साथ हुए दुराचार मामले का संज्ञान हाईकोर्ट ने लिया है. इसको लेकर दायर हुई जनहित याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है.
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नवनीत कुमार व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं को सुना. कोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता को मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा.
याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है. याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट अलका वर्मा ने कोर्ट को बताया कि मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की एक टीम ने सूबे के सभी बालिका गृहों का सोशल ऑडिट किया था. टीम ने 26 मई को अपनी रिपोर्ट बिहार सरकार को दी.
इसकी एक प्रति मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को भी भेजा था, जिसमें बालिका गृह की लड़कियों के यौनशोषण का सनसनीखेज खुलासा किया गया था. रिपोर्ट में ऑडिट टीम ने एक स्वयंसेवी संस्था के खिलाफ तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू करने और गहन छानबीन के साथ कार्रवाई करने की भी सिफारिश की थी. याचिकाकर्ताओं की तरफ से गुहार लगायी गयी कि इतने गंभीर कांड का खुलासा होने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है.
महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है. इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष पड़ताल सीबीआई जैसे विशेष जांच एजेंसी से करवायी जाये. मामले की अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी.
