पटना : 250 टोलों में स्वच्छ पानी देने की योजना फाइलों में दौड़ रही

पटना : आर्सेनिक प्रभावित भागलपुर जिले के कहलगांव व पीरपैंती और बेगूसराय जिले के बेगूसराय, बरौनी व मटिहानी प्रखंडों के 250 टोलों में स्वच्छ पानी देने की योजना अब तक फाइलों में ही दौड़ रही है. लोग अब भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. जबकि, योजना के तहत काम पूरा होने की अवधि लगभग […]

पटना : आर्सेनिक प्रभावित भागलपुर जिले के कहलगांव व पीरपैंती और बेगूसराय जिले के बेगूसराय, बरौनी व मटिहानी प्रखंडों के 250 टोलों में स्वच्छ पानी देने की योजना अब तक फाइलों में ही दौड़ रही है. लोग अब भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.
जबकि, योजना के तहत काम पूरा होने की अवधि लगभग एक साल पहले ही समाप्त हो गयी थी. समय पर काम पूरा नहीं होने पर फरवरी 2018 तक अवधि विस्तार किया गया. इसके बावजूद सरजमीन पर काम पूरा नहीं हुआ है.
जानकारों के अनुसार स्वच्छ पानी के लिए लगभग एक साल और इंतजार करना पड़ेगा. योजना के क्रियान्वयन को लेकर विभाग में लगातार समीक्षा बैठक हो रही है, लेकिन काम की गति तेज हो इस पर अधिकारियों का खास ध्यान नहीं है. इस वजह से जलापूर्ति योजना का काम लेनेवाली एजेंसी मनमाने ढंग से काम कर रही है.
भागलपुर में 141 टोलों में स्वच्छ पानी का इंतजार : भागलपुर के कहलगांव व पीरपैंती प्रखंडों के आर्सेनिक प्रभावित 141 टोलों में सतही जल आधारित बहुग्रामीय जलापूर्ति योजना से स्वच्छ पानी पहुंचाना है.
इसके लिए 219 करोड़ की राशि पर योजना स्वीकृत हुई. मुंबई की कंपनी के साथ जुलाई 2015 में काम के लिए एग्रीमेंट हुआ. काम फरवरी 2018 में समाप्त होना था.
60 हजार घरों में स्वच्छ पानी पहुंचाने की योजना
आर्सेनिक प्रभावित बेगूसराय जिले के बेगूसराय, बरौनी व मटिहानी प्रखंडों में लगभग 60 हजार घरों में स्वच्छ पानी पहुंचाने की योजना है. सतही जल आधारित बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना से गंगा का पानी स्वच्छ कर लोगों के घरों में पाइप से पहुंचाना है.
इसके लिए 191 करोड़ की राशि पर योजना स्वीकृत हुई. आर्सेनिक प्रभावित टोलों में स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए दिल्ली की एजेंसी मेसर्स गेनन डंकरले एंड कंपनी लिमिटेड के साथ 21 फरवरी 2015 को एग्रीमेंट हुआ था. एजेंसी को पहले 20 अगस्त 2017 तक गंगा का पानी साफ कर घरों में स्वच्छ पानी पहुंचाना था.
इसके बाद फरवरी 2018 तक काम समाप्त होने का समय निर्धारित हुआ. योजना के तहत सिमरिया में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना कर गंगा के पानी को साफ करना है. इसके बाद पानी को विभिन्न जलमीनार के माध्यम पाइप से घरों में पहुंचाना है.

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