”लौंडा नाच” को राष्ट्रीय पहचान देने की कवायद, भिखारी ठाकुर के इस चहेते कलाकार को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार !

पटना : बिहार के लोक नृत्य में से एक ‘लौंडा नाच’ को अब राष्ट्रीय फलक पर पहचान मिलने जा रही है. पिछले कई सालों कि मेहनत अब जा कर रंग लायी है. संगीत नाटक अकादमी ने लौंडा नाच के प्रसिद्ध कलाकार और भिखारी ठाकुर के साथ काम कर चुके सारण (ताजपुर) निवासी रामचंद्र मांझी को […]

पटना : बिहार के लोक नृत्य में से एक ‘लौंडा नाच’ को अब राष्ट्रीय फलक पर पहचान मिलने जा रही है. पिछले कई सालों कि मेहनत अब जा कर रंग लायी है. संगीत नाटक अकादमी ने लौंडा नाच के प्रसिद्ध कलाकार और भिखारी ठाकुर के साथ काम कर चुके सारण (ताजपुर) निवासी रामचंद्र मांझी को संगीत नाटक अकादमी अवार्ड 2017 के लिए चयनित किया है. सम्मान के राष्ट्रपति, मांझी को प्रशस्ति पत्र के साथ एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भेंट करेंगे. हालांकि, पुरस्कार की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जानेवाले भिखारी ठाकुर के नाटकों में काम करनेवाले मांझी 92 वर्ष के होने के बाद भी आज मंच पर जमकर थिरकते और अभिनय करते हैं. मांझी भिखारी ठाकुर के नाच दल में 10 वर्ष की उम्र से ही काम करते रहे. 1971 तक भिखारी ठाकुर के नेतृत्व में काम किया और उनके मरणोपरांत गौरीशंकर ठाकुर, शत्रुघ्न ठाकुर, दिनकर ठाकुर, रामदास राही और प्रभुनाथ ठाकुर के नेतृत्व में काम कर चुके हैं. वे आज भिखारी ठाकुर रंगमंडल के सबसे बुजुर्ग सदस्य हैं.

केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी ने बिहार के रामचंद्र मांझी का चयन लोक रंगमंच पुरस्कार के लिए किया है. मांझी का चयन अकादमी की समान परिषद की बैठक में किया गया है. अकादमी पुरस्कार 1954 से हर साल रंगमंच, नृत्य, लोक संगीत, ट्राइबल म्यूजिक सहित कई अन्य क्षेत्रों में दिया जाता है. इसके लिए हर साल देश भर से कलाकारों का चयन होता है.

लौंडा नाच बिहार की प्राचीन लोक नृत्यों में से एक है. इसमें लड़का, लड़की की तरह मेकअप और कपड़े पहन कर नृत्य करता है. किसी भी शुभ मौके पर लोग अपने यहां ऐसे आयोजन कराते हैं. हालांकि, आज समाज में लौंडा नाच हाशिए पर खड़ा है. अब गिने-चुने ही लौंडा नाच मंडलियां बची हैं, जो इस विधा को जिंदा रखे हुए है, लेकिन उनका भी हाल खस्ता ही है. नाच मंडली में अब बहुत कम ही कलाकार बचे हैं. बिहार में आज भी लोग लौंडा नाच का बेहद ही पसंद करते हैं. वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी ने पटना के युवा रंगकर्मी बिजेंद्र कुमार टॉक का चयन युवा पुरस्कार (लाइट डिजाइन) के लिए चयनित किया है.

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