पटना : सूबे में मछलियों का भी अब बीमा होगा. फसल बीमा की तर्ज पर मछलियों की अचानक मौत होने या चोरी होने पर मछलीपालकों को इसका मुआवजा मिलेगा. इसके लिए फिलहाल दो जिलों पूर्वी चंपारण और खगड़िया का चयन किया गया है. बीमा कंपनी के लिए टेंडर होने के बाद मछलीपालक और राज्य सरकार द्वारा अदा की जाने वाली प्रीमियम की राशि तय होगी.
यह जानकारी पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने गुरुवार को पत्रकारों को दी.सभी 38 जिला मत्स्य पदाधिकारियों के साथ दो दिवसीय बैठक के बाद पारस ने बताया कि राज्य में मछली उत्पादन 15.32% बढ़ा है. 2016-17 में मछलियों का उत्पादन 5.09 लाख मीट्रिक टन था, जो 2017-18 में .बढ़ कर 05.87 लाख मैट्रिक टन हो गया. जबकि बिहार में सालाना 6.42 मीट्रिक टन मछली की आवश्यकता है. उम्मीद है कि अगले साल तक बिहार मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जायेगा. उन्होंने कहा कि मछली के बीज का उत्पादन भी 24.25% बढ़ा है. 2016-17 में यह 3002.37 मिलियन था, जो 2017-18 में 3730.478 मिलियन हो गया.
144% बढ़ा जल क्षेत्र
मंत्री ने बताया कि जल क्षेत्र में 144% की बढ़ोतरी हुई है. यह 213.75 हेक्टेयर बढ़ कर 522.11 हेक्टेयर हो गया है. राजस्व में भी पिछले वर्ष के 947.06 करोड़ रुपये के मुकाबले 14.49% बढ़ाेतरी हुई है.
उन्होंने बताया कि 20% अबंदोबस्त रहे जल क्षेत्र को दीर्घकालीन अवधि (10 साल) के लीज पर बंदोबस्ती के लिए दिया जायेगा. मंत्री ने बताया कि मछली पालकों को नया तालाब निर्माण के लिए 50% और एससी-एसटी को 90% तक सब्सिडी दी जा रही है.
