बिहार विधान परिषद में जदयू अब भी सबसे बड़ी पार्टी, होंगे 32 सदस्य, राजद को मिलेगा मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा

पटना : विधान परिषद में सत्ताधारी दल जदयू अब भी सदन की सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेगी़ सात मई, 2018 से जब नये सदस्यों का कार्यकाल आरंभ हो जायेगा, तब 75 सदस्यीय सदन में जदयू के सबसे अधिक 31 सदस्य होंगे़ कार्यकारी सभापति को शामिल किया जाये तो यह संख्या 32 हो जायेगी़ दूसरी बड़ी […]

पटना : विधान परिषद में सत्ताधारी दल जदयू अब भी सदन की सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेगी़ सात मई, 2018 से जब नये सदस्यों का कार्यकाल आरंभ हो जायेगा, तब 75 सदस्यीय सदन में जदयू के सबसे अधिक 31 सदस्य होंगे़ कार्यकारी सभापति को शामिल किया जाये तो यह संख्या 32 हो जायेगी़
दूसरी बड़ी पार्टी भाजपा होगी. सदन में इसके 22 सदस्य होंगे़ बिहार विधानसभा में संख्या के लिहाज से सबसे बड़े दल राजद के विधान परिषद में नौ सदस्य होंगे़
कार्यकारी सभापति के तौर पर अभी जदयू के प्रो हारूण रशीद मनोनीत हैं. फिलहाल कम से कम अगले सत्र के आयोजित होने तक मौजूदा स्थिति ही बनी रहेगी़
पिछले दिनों कांग्रेस के चार सदस्यों के जदयू में शामिल हो जाने के बाद सदन में कांग्रेस को गहरा धक्का लगा था़ अब सात मई के बाद इस दल के सदस्यों की संख्या तीन हो जायेगी़
हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा को भी ऊपरी सदन में इंट्री मिल गयी है़ पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी दल के एकमात्र सदस्य होंगे़ राजद के नौ सदस्य हो जाने से उसे सदन में नेता विपक्ष की कुर्सी भी मिलेगी़ पूर्व सीएम राबड़ी देवी का नेता विपक्ष बनना तय माना जा रहा है.
वहीं संख्या बल के आधार पर राजद को एक मुख्य सचेतक और एक उप मुख्य सचेतक का पद भी मिल जायेगा़ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विधान परिषद के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने सामाजिक समीकरणों का ख्याल रखा है. 11 सीटों में दो सीटें सवर्णों को मिली़ं इसमें भाजपा के मंगल पांडेय और कांग्रेस के प्रेमचंद मिश्र शामिल हैं. जदयू और राजद दोनों ही दलों ने एक-एक मुस्लिम नेताओं को ऊपरी सदन जाने का अवसर दिया.
बाकी की सभी सात सीटें पिछड़ों के हिस्से गयीं. अब बदली हुई परिस्थिति में सदन में कुल आठ अल्पसंख्यक सदस्य होंगे, जिनमें छह प्रो हारूण रशीद, गुलाम रसूल बलियावी, सलमान रागीब, तनवीर अहमद, जावेद इकबाल अंसारी और खालिद अनवर जदयू कोटे के होंगे़ जबकि, कमरे आलम और खुर्शीद मोहसिन सदन में राजद का चेहरा होंगे़
गौरतलब है कि राज्यसभा की छह सीटों के लिए पिछले महीने हुए चुनाव में भाजपा, जदयू और राजद व कांग्रेस ने सवर्णों को ही उम्मीदवार बनाया था़ राजद ने एक मुस्लिम को भी सदन में भेज कर माय समीकरण को साधने की कोशिश की़

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