पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश का स्वरूप और दिशा ही अलग होती. वे विकेंद्रीकृत विकास के हिमायती थे और गांव-गांव का विकास करना चाहते थे, लेकिन उसे नहीं माना गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आजादी में अगर सरदार पटेल नहीं होते तो देश का यह रूप भी नहीं होगा और देश टुकड़ों में बंटा होता. सभी को एक करना उन्हीं की देन है.
मुख्यमंत्री मंगलवार को जदयू के किसान प्रकोष्ठ की ओर से श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित सरदार पटेल के 142वें जयंती समारोह में बोल रहे थे.
समारोह में उन्होंने कहा कि बापू ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था, जिससे सरदार पटेल प्रधानमंत्री नहीं बन सके. पंडित नेहरू ने भी अपने से जो बन पड़ा, वह काम किया. लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी आज गांव-शहर के लोग गरीबी से जूझ रहे हैं.
आजादी के बाद अगर महात्मा गांधी के विचारों के अनुसार विकास होता तो आज देश आदर्श बन जाता, लेकिन अब तो संघर्ष करना होगा. चंद लोगों के हाथों में अरबों की संपत्ति रह गयी और बाकी लोग गरीब ही रह गये.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में न्याय के साथ विकास ही हमारा संकल्प है. समाज के हर तबके और इलाके के लिए विकास किया जा रहा है. शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, सड़क के क्षेत्र में जो योजनाएं लागू की गयीं, उनमें सभी को शामिल किया गया. किसी भी राज्य का दायरा सीमित होता है, उसी अनुसार विकास का नजरिया बन गया. इसकी वजह से आजादी के बाद बिहार को भुगतना पड़ा.
बिहार के लोगों के बिना बाहर नहीं चलेगा काम
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के लोगों के बिना दूसरे राज्यों का काम नहीं चलने वाला है. यहां के लोग मेहनती, युवा और मेधावी हैं. पंजाब पूरी तरह यहां के लोगों की मेहनत पर ही निर्भर है.
अगर बिहार के लोग पंजाब से निकल जाएं तो वहां की हालत खस्ता हो जायेगी. वहीं बिहार के लोग अगर मन बना लें कि एक दिन काम नहीं करना है तो पूरी दिल्ली ठप पड़ जायेगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में बिहार का बंटवारा हुआ था और झारखंड अलग राज्य बना था तो लोग दुखी थे कि सारे खदान, संसाधन झारखंड में चले गये.
उस समय हमने कहा था कि अगर अच्छे से सरकार चली तो झारखंड देश का नंबर वन राज्य बनेगा. बिहार में भी ऐतिहासिक जगह, उपजाऊ धरती, मेहनती लोग रहते हैं, जिनकी बदौलत आज इतनी तरक्की हुई कि लोग भूल गये हैं कि झारखंड भी कभी बिहार के साथ था. बिहार का अपना दम है.
सरदार पटेल नहीं होते तो राजेंद्र प्रसाद नहीं बनते राष्ट्रपति : वशिष्ठ
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि सरदार पटेल नहीं होते तो डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति नहीं होते. जवाहरलाल नेहरू ने डॉ राजेंद्र प्रसाद से पूछा था कि वे राष्ट्रपति बनने के इच्छुक हैं तो उन्होंने इनकार कर दिया था. इस पर सरदार पटेल ने जब पूछा कि राष्ट्रपति क्यों नहीं बन रहे हैं तो राजेंद्र बाबू ने कहा कि पूछा ही गलत तरीके से गया था.
इसके बाद सरदार पटेल ने सभी को इसकी जानकारी दी और डॉ राजेंद्र प्रसाद को देश को पहला राष्ट्रपति बनाया गया. उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने ही भारत का स्वरूप खड़ा किया. वे शासन पद्धति जानते थे. अगर वे कुछ दिन और जिंदा होते तो अलग भारत होता.
समारोह को सांसद रामनाथ ठाकुर व संतोष कुशवाहा, पूर्व मंत्री रंजू गीता, किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मनोज कुशवाहा ने भी संबोधित किया. मौके पर विधान पार्षद रामवचन राय, संजय गांधी, उपेंद्र प्रसाद, राजकिशोर सिंह कक्कू, अरविंद ज्योति, महासचिव चंद्रिका सिंह दांगी, प्रवक्ता वरुण कुमार सिंह, कर्मवीर आजाद, मिथिलेश सिंह, रणविजय कुमार, बृजनंदन प्रसाद सैनी, सत्येंद्र कुमार समेत अन्य मौजूद थे.
