27 की रैली से तेजस्वी की राजनीतिक स्थिरता का फैसला
पटना : विधानसभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के राजनीतिक स्थिरता का निर्धारण 27 अगस्त को होनेवाली राजद की गांधी मैदान में आयोजित रैली करेगी. यह रैली भाजपा भगाओ, देश बचाओ के नाम से आयोजित होगी. इस रैली से दो राजनीतिक दिशाओं का निर्धारण होगा. पहला यह की राजद प्रमुख लालू प्रसाद […]
पटना : विधानसभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के राजनीतिक स्थिरता का निर्धारण 27 अगस्त को होनेवाली राजद की गांधी मैदान में आयोजित रैली करेगी. यह रैली भाजपा भगाओ, देश बचाओ के नाम से आयोजित होगी. इस रैली से दो राजनीतिक दिशाओं का निर्धारण होगा. पहला यह की राजद प्रमुख लालू प्रसाद का राष्ट्रीय राजनीति में फिर से वापसी पर मुहर लग सकती है और दूसरा राजद के युवा नेता तेजस्वी प्रसाद के राजनीतिक स्थिरता का निर्धारण हो सकता है.
यह पहला मौका होगा जब तेजस्वी सत्ता से दूर विपक्ष की भूमिका में अपने को पार्टी के अंदर और समर्थकों के बीच स्थापित करेंगे. तेजस्वी प्रसाद यादव ने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2010 के विधानसभा चुनाव से की. उस समय वह एक क्रिकेटर के रूप में चुनावी प्रचार टी शर्ट और जींस पहनकर करते थे. राजद के युवा चेहरा तेजस्वी प्रसाद यादव ने महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री के साथ भवन निर्माण, पथ निर्माण और पिछड़ा अति पिछड़ा कल्याण विभाग की कमान थामी थी. सीबीआइ की छापेमारी के बाद तेजस्वी यादव ने सफाई दी कि उनके कार्यकाल में उनके विभागों में भ्रष्टाचार के एक भी मामले नहीं आये हैं.
महागठबंधन से अलग होने के बाद उनको सदन में विरोधी दल के नेता की कमान सौंपी गयी. नीतीश सरकार द्वारा 28 जुलाई को विधानसभा में लाये गये विश्वासमत के प्रस्ताव पर उन्होंने अपने भाषण से विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष का भी दिल जीत लिया था. भाजपा को भी कठघरे में खड़ा किया. विरोधी दल के नेता के रूप में दिये गये पहले स्पीच से वह उत्साहित हैं. अब असल चुनौती 27 अगस्त को होनेवाली रैली है. पहली बार तेजस्वी को युवा राजद ने अप्रैल 2013 को तारामंडल में आयोजित परिचर्चा में युवा नेता के रूप में स्थापित करने की पहल की. परिचर्चा का विषय था बिहार में शिक्षा व्यवस्था और युवाओं का भविष्य. इसी कार्यक्रम में तेजस्वी ने टीशर्ट जींस को त्याग कर कुर्ता पैजामा धारण किया था.
इसके बाद वह प्रदेश भर में युवा सम्मेलन करने निकल पड़े थे. लालू प्रसाद ने 30 अगस्त, 2015 को गांधी मैदान में आयोजित महागठबंधन की रैली में तेजस्वी को मंच पर उतारा था. उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने पार्टी द्वारा जून में राजगीर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में अपनी धाक पार्टी में जमा ली. अब आगे की अग्नि परीक्षा बाकी है.
इसके बाद राजद द्वारा 15 मई, 2013 को गांधी मैदान में आयोजित परिवर्तन रैली में तेजस्वी अपने बड़े भाई तेज प्रताप के साथ पैदल चलकर गांधी मैदान पहुंचे.
परिवर्तन रैली 2014 के लोकसभा चुनाव और राज्य में नीतीश कुमार की सत्ता परिवर्तन के लिए आयोजित की गयी थी. इसके बाद तेजस्वी ने 30 जनवरी, 2014 को राजगीर में युवाओं का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया.
लालू प्रसाद ने जातिगत जनगणना की रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए 27 जुलाई, 2015 को बिहार बंद का आह्वान किया था. बिहार बंद कराने के लिए लालू प्रसाद अपने आवास 10 सर्कुलर रोड से तांगे पर तेजस्वी व तेजप्रताप के साथ बैठकर डाकबंगला चौराहे तक आये थे. यहां पर जनता को संबोधित करने के बाद लालू प्रसाद को तेजस्वी, तेजप्रताप और उनके कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था. उनको उस दिन बीएमपी कैंप में स्थापित किये गये अस्थायी जेल में शाम तक हिरासत में रखने के बाद शाम में मुचलके पर छोड़ दिया गया. इसके बाद
नौ अगस्त को चंपारण से शुरू करनेवाले यात्रा को विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने जनादेश अपमान विरोधी यात्रा का नाम दिया है. इस यात्रा के दौरान वह एनडीए खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किये गये जनादेश के अपमान को लेकर जनता को जानकारी देंगे. वह बतायेंगे कि कैसे गठबंधन तोड़ कर नीतीश कुमार भाजपा के सहयोगी हो गये.
इधर राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के जनादेश अपमान विरोधी यात्रा से भाजपा और जदयू नेताओं की बेचैनी बढ़ गयी है.
इसी बेचैनी के कारण उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और जदयू-भाजपा प्रवक्ताओं द्वारा अनर्गल बयानबाजी किया जा रहा है.विधानसभा में विश्वास मत के दौरान तेजस्वी ने मुख्यमंत्री एवं भाजपा के ऊपर कई गंभीर सवाल उठाये गये थे. एक सोची-समझी रणनीति के तहत उसका लाइव प्रसारण नहीं करवाया गया. उन सवालों का जवाब जदयू और भाजपा नेताओं द्वारा विधान सभा में अथवा जनता के बीच अब तक नहीं दिया गया. अब उन सवालों को जनता से अवगत कराने के लिए तेजस्वी लोगों के बीच में जा रहे हैं तो जदयू और भाजपा नेताओं की परेशानी बढ़ गयी है.
उनके पास उन सवालों को कोई जवाब नहीं है. श्री गगन ने नैतिकता की बात करने वाले जदयू नेताओं से पूछा है कि यदि नीतीश जी में थोड़ी भी नैतिकता होती और अपने चेहरे पर उन्हें इतना ही भरोसा होता तो वे इस्तीफा दें. नये जनादेश के लिए जनता के बीच में जाये. न कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में मिले जनादेश के खिलाफ रात के अंधेरे में भाजपा के साथ सरकार बना लिया.
