Patna News: पटना में सोमवार को होने वाले होलिका दहन को लेकर अग्निशमन विभाग और प्रशासन ने सुरक्षा का अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर लिया है. त्योहार की खुशियों में आग का खलल न पड़े, इसके लिए राज्यभर में 2500 फायर फाइटर्स को तैनात किया गया है और सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं.
विभाग का दावा है कि शहर के किसी भी कोने से आग की सूचना मिलने पर महज 2 मिनट के भीतर दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंच जाएगी. सुरक्षा के इस ‘मिशन 120 सेकंड’ को सफल बनाने के लिए दमकलों को रणनीतिक रूप से चिन्हित स्थानों के पास खड़ा किया गया है.
445 स्थानों पर होलिका, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राजधानी पटना में 445 स्थानों पर होलिका दहन होना है, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना गया है. इनमें हाईराइज इमारतों के पास के इलाके, पेट्रोल पंप, भीड़भाड़ वाले चौक और बाजार शामिल हैं. दमकल गाड़ियों को इन स्थानों से रणनीतिक दूरी पर खड़ा किया गया है ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके.
शहर को चार जोन में बांटकर जवानों की तैनाती की गई है और कंट्रोल रूम से निगरानी रखी जाएगी. विभाग ने रूट मैपिंग कर ली है और अधिकारियों का दावा है कि सूचना मिलते ही दो मिनट में टीम मौके पर पहुंच सकती है.
होलिका में टायर-प्लास्टिक जलाना बना बड़ा खतरा
सुरक्षा तैयारियों के बीच प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने लोगों से खास अपील की है कि होलिका दहन में टायर, प्लास्टिक, पॉलीथिन और कूड़ा न डालें. इन चीजों के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें निकलती हैं, जो सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती हैं.
डॉक्टरों के अनुसार इससे अस्थमा के मरीजों की हालत बिगड़ सकती है, कैंसर का खतरा बढ़ सकता है और इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ता है.
परंपरागत तरीके बने सुरक्षित विकल्प
शहर के कई इलाकों में सूखी लकड़ी, गोबर के उपले, पुआल और प्राकृतिक सामग्री से होलिका सजाने की परंपरा अपनाई जा रही है. कपूर, लौंग और धूप की आहुति से वातावरण शुद्ध रखने की कोशिश की जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यही तरीका पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए सुरक्षित है.
ऊर्जा विभाग ने चेतावनी दी है कि बिजली के खंभों, ट्रांसफॉर्मरों या तारों के नीचे होलिका दहन न किया जाए. आग की लपटों से तार जलने या टूटने पर बड़े हादसे हो सकते हैं और त्योहार का रंग फीका पड़ सकता है.
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