पटना हॉस्टल कांड: परिजनों का CBI पर आरोप- हमें ही साक्ष्य ढूंढने को कह रही एजेंसी

Patna NEET Student Death Case: पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का मामला अब और पेचीदा होता जा रहा है. जांच की जिम्मेदारी संभाल रही सीबीआई पर ही अब सवाल उठने लगे हैं. राहत की उम्मीद कर रहे परिजन अब नाराज हैं और उन्होंने साफ कहा है कि अगर सही जांच नहीं हुई तो वे जनता की अदालत का रुख करेंगे.

Patna NEET Student Death Case: शनिवार को सीबीआई की नई जांच अधिकारी विभा कुमारी ने मृतका के मामा से करीब दो घंटे तक पूछताछ की, लेकिन इस मुलाकात के बाद परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है.

परिजनों का सीधा आरोप है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI साक्ष्य जुटाने के बजाय उनसे ही सबूत मांग रही है और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है.

पूछताछ के बाद क्यों भड़के परिजन?

छात्रा के मामा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनसे वही पुराने सवाल दोहराए जा रहे हैं, जिनका जवाब वे पहले ही पटना पुलिस, एसआईटी और सीबीआई को दस बार दे चुके हैं. परिजनों का आरोप है कि छात्रा के नाबालिग होने के बावजूद शुरुआत में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं किया गया और न ही पिछले आईओ ने कोर्ट में हॉस्टल संचालक की जमानत का विरोध किया.

वकील एसके पांडे ने दावा किया कि सीबीआई अब परिजनों पर इस बात का दबाव बना रही है कि वे इसे ‘आत्महत्या’ मान लें, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दरिंदगी की बात सामने आई थी.

डॉक्टर से आमने-सामने क्यों नहीं हुए?

जांच के दौरान एक असहज स्थिति तब पैदा हुई जब सीबीआई ने प्रभात मेमोरियल अस्पताल के डॉ. सतीश को भी पूछताछ के लिए बुलाया. छात्रा के मामा ने उनके साथ एक ही टेबल पर बैठकर बात करने से साफ इनकार कर दिया.

परिजनों का कहना है कि जिस डॉक्टर ने पीड़िता के परिवार पर ही हत्या का मनगढ़ंत आरोप लगाया हो, उसके सामने बैठकर चर्चा करने का कोई तुक नहीं बनता.

जांच में अब क्या नए एंगल सामने आए?

सीबीआई की जांच में अब एक करीबी लड़के का जिक्र भी आया है, जिसकी फोटो और स्नैपचैट डिटेल परिजनों को दिखाई गई. परिजनों का कहना है कि पटना पुलिस की एसआईटी पहले ही 25 संदिग्धों के सैंपल ले चुकी है, जिनमें से किसी का भी डीएनए छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म से मैच नहीं हुआ.

अब सीबीआई नए सिरे से मोबाइल की सीडीआर (CDR) खंगाल रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मुख्य संदिग्धों को अब तक रिमांड पर लेकर उनके मोबाइल डेटा की जांच क्यों नहीं की गई?

आगे क्या होगा?

6 जनवरी को हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली छात्रा ने 11 जनवरी को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने दुष्कर्म की पुष्टि कर इस केस को हत्या और बलात्कार की श्रेणी में ला खड़ा किया है.

अब 23 मार्च को पॉक्सो अदालत में होने वाली अगली सुनवाई का इतंजार हैं. परिजनों का कहना है कि अगर उन्हें केंद्रीय एजेंसी से न्याय की उम्मीद नहीं दिखी, तो वे अपनी बात लेकर जनता के बीच जाएंगे और न्याय की गुहार लगाएंगे.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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